नीरज बवानिया के दोनों बच्चों की मौत से परिवार में मातम, पत्नी से मुलाकात के लिए पैरोल की मांग

नीरज बवानिया के दोनों बच्चों की मौत से परिवार में मातम, पत्नी से मुलाकात के लिए पैरोल की मांग

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026 । दिल्ली के कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवानिया से जुड़ी एक दुखद खबर सामने आई है। खबर के मुताबिक, उसके दोनों बच्चों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बताया जा रहा है कि नीरज बवानिया ने अपनी पत्नी से मिलने के लिए कस्टडी पैरोल की मांग की है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जेल में बंद कैदियों को पारिवारिक आपात स्थिति में मिलने वाली राहत और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पर ध्यान खींचा है।

पत्नी से 14 अक्टूबर को मिलने के लिए कोर्ट में डाली अर्जी

पुलिस के मुताबिक, नीरज पर पर फिलहाल सात केस हैं, जिनमें से 6 में जमानत पर है। स्पेशल सेल ने उसे 7 अप्रैल 2015 को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि 25 अगस्त 2015 को जेल वैन में नीरज और उसके साथियों ने विरोधी गिरोह के दो सदस्यों की हत्या कर दी थी। इसी मामले में वो 11 साल से जेल में है। अब बच्चों की मौत के बाद पत्नी से मिलने के लिए उसने एक बार फिर कोर्ट का रुख किया है।

कस्टडी पैरोल एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत पात्र कैदी को निर्धारित शर्तों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच किसी विशेष परिस्थिति में जेल से बाहर ले जाया जा सकता है। पारिवारिक शोक, अंतिम संस्कार या अन्य गंभीर परिस्थितियों में इस तरह की राहत की मांग की जा सकती है। हालांकि, कस्टडी पैरोल मिलना स्वतः अधिकार नहीं है। संबंधित अधिकारी मामले के तथ्यों, लागू नियमों और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर विचार करते हैं।

पत्नी और बच्चों से मिलने के लिए कई बार मिली कस्टडी परोल

नीरज की पत्नी ने 14 अगस्त को सर्जरी से 3 बच्चों को जन्म दिया था। इनमें से एक की कुछ घंटे बाद मौत हो गई थी। पत्नी और बच्चों से मिलने के लिए नीरज को 26 अगस्त और 17 सितंबर को कस्टडी परोल मिली थी। बीमार पत्नी को अस्पताल में देखने के लिए हाई कोर्ट ने उसे 1 जुलाई को भी कस्टडी परोल दी थी। अब दोनों नवजात बच्चों की मौत के बाद नीरज ने 14 अक्टूबर को पत्नी से मिलने के लिए कस्टडी परोल मांगी है।

नीरज बवानिया की ओर से पत्नी से मुलाकात के लिए कस्टडी पैरोल मांगे जाने की खबर के बीच अब संबंधित अधिकारियों के निर्णय पर नजर रहेगी। पैरोल की अवधि, अनुमति और शर्तें सक्षम प्राधिकारी के फैसले तथा लागू नियमों पर निर्भर करेंगी।

इस मामले में आवेदन स्वीकार होने या अंतिम निर्णय होने की पुष्टि के बिना यह कहना उचित नहीं होगा कि नीरज बवानिया को पैरोल मिल गई है। घटना और आवेदन से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।