वकीलों की हड़ताल से मुवक्किल त्रस्त, रेखा सरकार मस्त
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर l "
नई दिल्ली l दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील उपराज्यपाल वी के सक्सेना की ओर से जारी की गई उस अधिसूचना के विरोध में पिछले चार दिन से हड़ताल पर हैं, जिसमें कहा गया है कि पुलिस थाने में किसी आपराधिक मामले की जांच करने वाले अधिकारी को न्यायालय में आकर अपना पक्ष रखने की जरूरत नहीं है, बल्कि वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही बचाव पक्ष की ओर से सवाल पूछने वाले वकील को जवाब देगा l
इस मामले को लेकर हड़ताली वकीलों के प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात की थी, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला l मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले वकीलों के मुताबिक रेखा गुप्ता ने शीघ्र ही इस मामले में उपराज्यपाल से बातचीत करने का भरोसा दिलाया था, मगर अब तक कुछ भी नहीं हुआ l
वकीलों की हड़ताल के कारण न्याय पाने की आशा में अदालतों के चक्कर काटने वाले लाखों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है l वैसे भी हमारे देश में न्यायिक प्रक्रिया काफी लंबी व जटिल है l जिसमें आम आदमी को न्याय मिलने में काफी समय लग जाता है, ऐसे में वकीलों की हड़ताल उनके इंतजार को और भी लंबा कर रही है l
उपराज्यपाल वी के सक्सेना की ओर से जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि हर थाने में एक पूछताछ कक्ष बनाया जाएगा l इस कक्ष में आपराधिक मामले का जांच अधिकारी अभियुक्त के साथ पूछताछ करेगा l इस दौरान अभियुक्त का वकील वहां मौजूद नहीं होगा l इतना ही नहीं आपराधिक मामले का जांच अधिकारी अदालत में भी पेश नहीं होगा l वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही बचाव पक्ष के वकील के सवालों का जवाब देगा l
वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दू शेखर के मुताबिक उपराज्यपाल की ओर से जारी की गई यह अधिसूचना संविधान और भारतीय दंड संहिता दोनों के ही विरुद्ध है l उनके मुताबिक किसी भी अभियुक्त के वकील की अनुपस्थिति में जांच अधिकारी उस पर नाजायज़ दबाव बना कर या थर्ड डिग्री की यातना देकर उसे अपने मन मुताबिक बयान देने के लिए मजबूर कर सकता है l उन्होंने बताया कि कानून में पुलिस थाने में अभियुक्त की ओर से दफा 161 के तहत दर्ज कराए गए बयान की कोई अहमियत नहीं है। उनकी सत्यता की जांच के लिए उनका न्यायाधीश के समक्ष दफा 164 के तहत दर्ज करना जरूरी है। इस दौरान अभियुक्त का वकील जांच अधिकारी के साथ सवाल जवाब कर अपने मुवक्किल पर लगाए गए आरोपों को निराधार साबित कर सकता है l
उन्होंने बताया कि जब जांच अधिकारी अदालत के सामने पेश ही नहीं होगा तो वकील उससे जिरह करके अपने मुवक्किल को भला निर्दोष साबित कैसे कर पाएंगे l इस अधिसूचना से पुलिस किसी भी निर्दोष व्यक्ति को आसानी से अपराधी साबित कर देगी l
इस मामले को लेकर दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात की थी, जिन्होंने उनकी मदद करने और मुद्दे का हल निकालने का भरोसा दिलाया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कुछ भी नहीं हुआ l
वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर गुप्ता ने इस तरह की अधिसूचना जारी करने की आवश्यकता और उसकी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अदालत में न्यायाधीश से लेकर वकील, अभियोजन पक्ष, अभियुक्त व गवाह तक उपस्थित हो सकते हैं तो फिर भला मामले की जांच करने वाला अधिकारी क्यूँ नहीं उपस्थित हो सकता l
एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता विजय पाल शर्मा के मुताबिक इस अधिसूचना से स्वभाविक न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होगी, जिसके तहत सभी को न्याय पाने और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत साबित करने का अधिकार प्राप्त है l
उन्होंने कहा कि इस अधिसूचना के जरिए उपराज्यपाल ने पुलिस राज कायम करने और जांच के नाम पर निर्दोष लोगों को अपराधी साबित करने वाले पुलिस अधिकारियों का बचाव किया है, इसका हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए l
वरिष्ठ अधिवक्ता अमित राघव के मुताबिक वकील आम आदमी के न्याय पाने के अधिकार की रक्षा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं l वकीलों की यह हड़ताल उनके कानूनी हक व व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं बल्कि आम आदमी के लिए है, इसलिए उन्हें इस अधिसूचना के विरोध में खुल कर सड़कों पर आना चाहिए l
इसी मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता करतार सिंह ने बहुत ही महत्वपूर्ण तर्क सामने रखते हुए कहा कि जब पुलिस अधिकारी माननीय न्यायधीश के सामने गलत बयान देकर उन्हें गुमराह करने से बाज नहीं आते हैं l जब पुलिस अधिकारियों को अदालत में पेश होने से छूट मिल जाएगी, तब तो वह और भी आसानी से थाने में ही न्याय का गला घोंट देंगे l
करतार सिंह के मुताबिक जब वकील वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपने मुवक्किल के जांच अधिकारी के साथ सवाल करेगा तो वह जबाव न सूझने का बहाना बनाकर फोन काट देगा, फिर बाद में कानूनी जानकारों से राय लेकर जबाव देकर अपनी जांच को जायज ठहरा देगा l
हैरानी की बात तो यह है कि न तो वकीलों की इस हड़ताल और न ही इससे होने वाली परेशानी पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हर बात पर बयान जारी करने वाले दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कोई ध्यान दिया है l जबकि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने न केवल हड़ताली वकीलों का समर्थन किया है बल्कि उपराज्यपाल से यह काली अधिसूचना वापस लेने की मांग भी की है l
वकीलों की राय व उनके हितों को दरकिनार कर दें, तो भी यह बात साफ तौर पर उभर कर सामने आती है कि उपराज्यपाल की ओर से जारी की गई इस अधिसूचना से दिल्ली पुलिस के थानों में तैनात भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले बुलंद हो जाएंगे l क्योंकि उन्हें लगेगा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामले में फंसा देने पर भी उनका कुछ नहीं बिगड़ेगाl क्योंकि इस अधिसूचना के बाद न तो अदालत में उसे न्यायाधीश की पारखी नजर का सामना करना पड़ेगा और न ही बचाव पक्ष के तीखे सवालों का |


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