मल्टी इंजन सरकार के फायदे कम, नुकसान ज्यादा हैं
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर l "
नई दिल्ली l दिल्ली विधानसभा में एक लाख करोड़ रुपए का बजट पेश करने वाली अपनी रेखा दीदी से दिल्लीवासियों खासकर छात्रों, बुजुर्ग एवं महिलाओं को उनसे यह उम्मीद बंधी कि वह भले ही उन्हें दिल्ली मेट्रो में निःशुल्क यात्रा की सुविधा मुहैया न करवा सकें, लेकिन वह उन्हें दिल्ली की जीवन रेखा मेट्रो के किराये में थोड़ी कमी करा कर उन्हें राहत प्रदान करेंगी l
क्योंकि जिस प्रकार से सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के अंतर्गत चलने वाली बसों की संख्या में कमी हुई है और दिल्ली की ऐप आधारित कंपनी ओला, उबर और रेपिङो को किराए दुगने करने की अनुमति प्रदान की गई, उसे देखते हुए इस प्रकार की उम्मीद रखना गलत भी नहीं था l
खैर अब दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से किराए बढ़ाने और उसके संचालन पर भी बात कर ली जाए।
इससे पहले साल 2017 में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने दो बार किराए में बढ़ोतरी की थी, पहली बार मई 2017 में जब दिल्ली मेट्रो के किराए बढ़ाए गए थे तब न्यूनतम किराया आठ रुपए से बढ़ा कर दस रुपए कर दिया गया था, जबकि अधिकतम किराए की सीमा 30 रुपए से बढ़ा कर 50 रुपए कर दी गई थी l इसके बाद इसी साल अक्टूबर में भी मेट्रो के किराए बढ़ा दिए गए l तब न्यूनतम किराए के साथ तो किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई , लेकिन अधिकतम किराए की सीमा 50 रुपए से बढ़ा कर 60 रुपए कर दी गई थी l
अब दिल्ली मेट्रो के किराए में दूरी के अनुसार एक से लेकर चार रुपए तक की वृद्धि करने के साथ ही उसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है l हालांकि इस वृद्धि के बारे में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और दिल्ली सरकार दोनों की ओर से दावा किया गया है कि इस मामूली सी वृद्धि से आम आदमी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा l लेकिन यह बात पूरी तरह से गलत है, क्योंकि पहले से ही मंहगाई की मार से त्रस्त जनता मेट्रो के किराए की वृद्धि के इस बोझ को सहन नहीं कर पाएगी l जिसकी वजह से उसे आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन के दूसरे विकल्प तलाशने होंगे l वैसे भी यह आसान नहीं होगा l क्योंकि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े की बसों की संख्या बढ़ाने के बजाय 2017 बसें कम कर दी हैं, इनमें से डीटीसी की 1684 बसों को उनके चलने की समय सीमा पार करने के कारण बेड़े से हटा दिया गया है l जबकि अनुबंध के आधार पर चलने वाली 533 बसों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं l
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन वैसे तो समय समय पर परिचालन का खर्च बढ़ जाने व अन्य कारणों का हवाला देते हुए मेट्रो के किराए बढ़वाने का प्रयास करती रही है l लेकिन कभी केंद्र और कभी राज्य सरकार के विरोध के कारण उसे सफ़लता नहीं मिली थी l मगर इस बार दिल्ली में मल्टी इंजन की सरकार बनते ही उसका प्रस्ताव बिना किसी आपत्ति के मंजूर हो गया l
जब पिछली बार दिल्ली मेट्रो के किराए बढ़ाए गए थे तब मजबूरी में छात्रों, सामान्य कामकाजी वर्ग और मध्यम वर्ग के नौकरी पेशा लोगों ने मेट्रो में सफर करने के बजाए डीटीसी बसों की ओर रुख कर लिया था l मेट्रो के यात्रियों की संख्या में कमी आने की पुष्टि मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने भी की थी।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि दिल्ली मेट्रो में सफाई व अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति पहले की तुलना में काफी खराब हो गई हैं l दिल्ली मेट्रो के लगभग सभी स्टेशनों पर खान पान स्टालों का जाल बिछा दिया गया है, लोग न केवल इन स्टाल पर खाने पीने का लुत्फ उठाते हैं, बल्कि यहां से खान-पान की सामग्री खरीद कर मेट्रो में भी ले जाते हैं l अगर कोई उन्हें टोकता है तो उनका तर्क यह होता है कि जब स्टेशन पर इनकी बिक्री हो रही है तो फिर वह इसे मेट्रो के भीतर क्यों नहीं ले जा सकते हैं l अब तो दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से डिब्बे के भीतर की जाने वाली वह घोषणा भी बंद कर दी गई है, जिसमें कहा जाता था कि मेट्रो रेल के डिब्बे में खाना, पीना व धूम्रपान करना वर्जित है l
इसी प्रकार से अब मेट्रो के भीतर तेज आवाज में मोबाइल पर संगीत बजाना व तेज आवाज में रील देखना भी आम बात हो गई है, इस संबंध में की जाने वाली घोषणा भी बंद कर दी गई है l


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