सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला, न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
नई दिल्ली, 18 मई 2026 । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी।सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ और तेजी से न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जजों की संख्या बढ़ाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में पहले की तुलना में अधिक न्यायाधीश नियुक्त किए जाएंगे, जिससे देश की सर्वोच्च अदालत की कार्यक्षमता और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने 'उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026' जारी करने को मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) हो जायेगी। इस अध्यादेश से 'उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956' में संशोधन किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी, लंबित केसों का दबाव कम होगा और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी। वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट में हजारों मामले लंबित हैं, जिनमें संवैधानिक, आपराधिक, नागरिक और जनहित याचिकाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अदालतों में तकनीकी संसाधन, डिजिटल सुनवाई व्यवस्था और न्यायिक ढांचे को भी मजबूत करना जरूरी है। हालांकि इस फैसले को न्यायिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि न्यायपालिका को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। आने वाले समय में नई नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है, जिससे न्यायिक व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।


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