गैरसैंण में विधानसभा सत्र शुरू, ₹7,412 करोड़ के अनुपूरक बजट पर चर्चा

गैरसैंण में विधानसभा सत्र शुरू, ₹7,412 करोड़ के अनुपूरक बजट पर चर्चा

देहरादून, 27 अक्टूबर 2026 | उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को विधानसभा सत्र शुरू हो गया। करीब सात महीने बाद एक बार फिर भराड़ीसैंण में सदन की कार्यवाही हो रही है। एक साल के भीतर यह दूसरी बार है, जब यहां विधानसभा सत्र आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय सत्र में सरकार 2026-27 के लिए 7,412 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राज्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसके बाद से यहां समय-समय पर विधानसभा की कार्यवाही संचालित होती रही है। हालांकि, कुछ वर्षों में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ, जबकि कुछ वर्षों में एक बार विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2014 में गैरसैंण में पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2017 में दो दिवसीय सत्र हुआ। वर्ष 2018 में विधानसभा की कार्यवाही छह दिन तक चली। वर्ष 2019 में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ। वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र आयोजित किया गया, जबकि वर्ष 2021 में एक से छह मार्च तक भराड़ीसैंण में छह दिवसीय बजट सत्र चला।

सात महीने बाद भराड़ीसैंण पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण, मंत्रियों और विधायकों के भराड़ीसैंण पहुंचने के साथ ही सत्र की तैयारियां पूरी कर ली गईं। विधानसभा परिसर और आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों ने सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं।

इससे पहले मार्च 2026 में भराड़ीसैंण में बजट सत्र आयोजित हुआ था। अब अक्टूबर में दोबारा सत्र बुलाए जाने से गैरसैंण में विधानसभा की गतिविधियां बढ़ी हैं। हालांकि, सत्र की अवधि केवल दो दिन निर्धारित की गई है।

7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट होगा पेश

इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा उत्तराखंड का अनुपूरक बजट है। राज्य मंत्रिमंडल ने 7,412 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को मंजूरी दी है। सरकार इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सदन में पेश करेगी।

अनुपूरक बजट के जरिए सरकार चालू वित्तीय वर्ष में उन खर्चों के लिए अतिरिक्त धन का प्रावधान करती है, जिनकी जरूरत मूल बजट तैयार होने के बाद सामने आती है। इसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं, विकास कार्यों और अन्य स्वीकृत जरूरतों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जा सकता है।

सदन में बजट पेश होने के बाद इस पर चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

31 विधायकों ने लगाए 445 सवाल

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के अनुसार, सत्र के लिए 31 विधायकों की ओर से कुल 445 सवाल प्राप्त हुए हैं। विधायकों के प्रश्नों के माध्यम से राज्य के विकास, जनसमस्याओं, सरकारी योजनाओं और विभागीय कामकाज से जुड़े मुद्दे उठाए जा सकते हैं।

हालांकि, दो दिन के सीमित सत्र में सभी सवालों पर चर्चा हो पाएगी या नहीं, यह सदन की कार्यवाही और तय कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। सत्र की अवधि बढ़ाने का फैसला भी संबंधित प्रक्रिया के तहत लिया जा सकता है।

सत्र के पहले दिन दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम रखा गया है। इसके बाद अनुपूरक बजट और अन्य विधायी कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

रिपोर्टों के मुताबिक, सदन में अनुपूरक बजट सहित कुल 10 विधेयक पेश किए जा सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों और आयोगों की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जा सकती हैं। इन विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया सदन के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी।

विपक्ष ने भी बनाई घेराव की रणनीति

विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष और कुछ संगठनों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की है। कांग्रेस, प्रदेश प्रधान संगठन और उत्तराखंड क्रांति दल ने विधानसभा घेराव की योजना बनाई है। ऐसे में सदन के भीतर विधायी कामकाज के साथ-साथ विधानसभा परिसर के बाहर भी राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

प्रशासन ने सत्र को देखते हुए करीब 1,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को सुचारू बनाए रखना और प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

गैरसैंण में विधानसभा सत्र का क्या है महत्व?

गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है। भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करना राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों को प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, गैरसैंण में अब तक विधानसभा सत्रों की अवधि सीमित रहने को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में मौजूदा सत्र में यह देखना अहम होगा कि विधायकों को राज्य के मुद्दे उठाने के लिए कितना समय मिलता है और सरकार जनहित से जुड़े सवालों पर क्या जवाब देती है।