पाकिस्तान से नजदीकी पर मालदीव में घमासान, मुइज्जू को नशीद की चेतावनी

पाकिस्तान से नजदीकी पर मालदीव में घमासान, मुइज्जू को नशीद की चेतावनी

माले, 28 अक्टूबर 2026 | मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। पाकिस्तान के तीन दिवसीय दौरे और दोनों देशों के बीच रक्षा समेत 20 क्षेत्रों में समझौतों के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के अध्यक्ष मोहम्मद नशीद ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ने से भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि मालदीव को भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव में उलझने से बचना चाहिए।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के पाकिस्तान से बढ़ते रिश्तों पर देश में विरोध शुरू हो गया है। मुइज्जू 20 से 22 अक्टूबर तक पाकिस्तान के दौरे पर थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, रक्षा और समुद्री सुरक्षा समेत 20 समझौते हुए।

इसे लेकर पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने चेतावनी दी है कि अगर भारत को अपनी सुरक्षा पर खतरा लगा, तो मालदीव को इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।

11 साल बाद मालदीव के राष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा

राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक पाकिस्तान की राजकीय यात्रा की। करीब 11 साल बाद किसी मालदीव के राष्ट्रपति का यह पहला पाकिस्तान दौरा था। इस यात्रा के दौरान मुइज्जू ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर समेत वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।

दोनों देशों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, कृषि, पर्यटन, साइबर सुरक्षा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 20 समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया। दोनों सरकारों ने अगले दो वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 13.9 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 200 मिलियन डॉलर करने का लक्ष्य भी रखा। 

पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने क्यों जताई चिंता?

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने पाकिस्तान के साथ बढ़ते सैन्य सहयोग पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, छोटे देशों को क्षेत्रीय शक्तियों के बीच विवादों में शामिल होने से बचना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तान के साथ सैन्य संबंध मजबूत करने से भारत की चिंताएं बढ़ सकती हैं और इससे मालदीव की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार से समझौतों, खासकर रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े समझौतों, का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। हालांकि, ये विपक्षी नेताओं की चिंताएं और राजनीतिक आकलन हैं। इन बयानों से यह साबित नहीं होता कि मालदीव सरकार ने भारत के खिलाफ कोई कदम उठाने का फैसला किया है। 

भारत ने भी समझौतों पर रखी नजर

मालदीव और पाकिस्तान के बीच हुए समझौतों पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 24 अक्टूबर को कहा था कि भारत इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएगा।

भारत के लिए मालदीव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर में स्थित यह द्वीपीय देश भारत के समुद्री पड़ोस का अहम हिस्सा है। ऐसे में मालदीव की रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी साझेदारियों पर भारत की नजर रहना स्वाभाविक है। 

पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मुइज्जू के साथ बातचीत में जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान का पक्ष रखा। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मुइज्जू ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के रुख का समर्थन नहीं किया।

मुइज्जू ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की बैठक फिर से आयोजित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। संगठन का पिछला शिखर सम्मेलन 2014 में काठमांडू में हुआ था। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते इसके बाद शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका है। 

‘इंडिया आउट’ अभियान से सत्ता तक पहुंचे थे मुइज्जू

मोहम्मद मुइज्जू ने 2023 में ‘इंडिया आउट’ अभियान के समर्थन से चुनाव जीतकर सत्ता संभाली थी। इस अभियान में मालदीव में मौजूद भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी की मांग प्रमुख थी। मई 2024 में भारतीय सैन्यकर्मियों की जगह भारतीय विमानों के संचालन और रखरखाव के लिए नागरिक तकनीकी कर्मियों ने जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद मुइज्जू सरकार ने भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में भी कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में मालदीव की राजकीय यात्रा की थी। अब पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि सरकार दोनों पड़ोसी देशों के साथ संतुलन कैसे बनाए रखेगी। 

मालदीव के सामने भारत और पाकिस्तान के बीच संतुलन की चुनौती

मालदीव सरकार अपनी विदेश नीति को ‘मालदीव फर्स्ट’ बताती है और विभिन्न देशों के साथ संबंध मजबूत करने की बात करती है। पाकिस्तान के साथ व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना इसी नीति का हिस्सा हो सकता है। लेकिन रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े समझौतों के क्षेत्रीय प्रभाव भी हो सकते हैं।

ऐसे में मुइज्जू सरकार के सामने चुनौती है कि वह पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाते हुए भारत के साथ अपने महत्वपूर्ण संबंधों को भी बनाए रखे। फिलहाल इस मुद्दे पर मालदीव के भीतर राजनीतिक बहस जारी है। आने वाले समय में समझौतों का विवरण और उनका क्रियान्वयन इस बहस की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।