62 प्रदूषण और जाम वाले हॉटस्पॉट पर बनेगी कमिटी, सांसद-विधायक करेंगे निगरानी

62 प्रदूषण और जाम वाले हॉटस्पॉट पर बनेगी कमिटी, सांसद-विधायक करेंगे निगरानी

नई दिल्ली, 06 अक्टूबर 2026 । दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए सरकार ने ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने की दिशा में नया एक्शन प्लान तैयार किया है। राजधानी में प्रदूषण और ट्रैफिक से प्रभावित 62 हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं। अब इन क्षेत्रों में सुधार और निगरानी की जिम्मेदारी सांसदों और विधायकों समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों को देने की तैयारी है।

योजना के तहत संबंधित इलाकों में विशेष कमिटियां बनाई जाएंगी। ये कमिटियां स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक, प्रदूषण, सड़क व्यवस्था और अन्य समस्याओं की समीक्षा करेंगी तथा संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर सुधार कार्यों की निगरानी करेंगी।

सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए इस बार अधिकारियों के साथ स्थानीय सांसदों, विधायकों को भी हॉट स्पॉट की निगरानी में लगाने का फैसला किया है। इसके लिए एक हॉट स्पॉट सेंट्रिक कमिटी बनेगी। यह कमिटी हॉट स्पॉट से 3 किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण के कारणों को चिह्नित करने के साथ उसे दूर करने के लिए काम करेगी। इसमें ट्रैफिक पुलिस को भी साथ लिया जाएगा।

62 हॉटस्पॉट पर फोकस

दिल्ली सरकार ने ऐसे स्थानों की पहचान की है जहां प्रदूषण के साथ-साथ ट्रैफिक जाम की समस्या भी ज्यादा रहती है। सरकार के अनुसार 62 हॉटस्पॉट में से 42 पर काम किया जा चुका है, जबकि आठ स्थानों पर अक्टूबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बाकी 12 स्थानों पर लंबे समय में सुधार किए जाने हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रदूषण के आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि हॉटस्पॉट की वास्तविक समस्या की पहचान कर वहां तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। हाल ही में दिल्ली में प्रदूषण स्रोतों की रियल-टाइम निगरानी के लिए Integrated Command and Control Centre भी शुरू किया गया है।

सांसद और विधायक करेंगे निगरानी

नए प्लान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया गया है। सांसद, विधायक, पार्षद और संबंधित नोडल अधिकारी हॉटस्पॉट की स्थिति की नियमित समीक्षा करेंगे। इससे सड़क, ट्रैफिक, निर्माण कार्य, धूल और अन्य स्थानीय समस्याओं पर विभागों की जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

हॉटस्पॉट आधारित निगरानी के साथ अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया जा रहा है। दिल्ली में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, डीटीसी और अन्य एजेंसियों की भूमिका रहती है। ऐसे में समन्वय को इस योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण के साथ ट्रैफिक जाम कम करना भी एक्शन प्लान का बड़ा हिस्सा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर अलग-अलग स्थानों पर डी-कंजेशन ट्रायल किया जाएगा। इसका उद्देश्य वाहनों की आवाजाही को सुचारु करना और जाम वाले स्थानों पर ट्रैफिक फ्लो को बेहतर बनाना है।

सरकार की व्यापक योजना में कई प्रमुख सड़क हिस्सों को सिग्नल-फ्री या कम-जाम वाला बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे पीक ऑवर में वाहनों के रुकने का समय घटाने और ईंधन की खपत व वाहन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने पर जोर

दिल्ली की प्रदूषण समस्या में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना भी जरूरी माना जा रहा है। वर्ष 2026 के एक्शन प्लान में बस सेवाओं को बढ़ाने, मेट्रो और नमो भारत नेटवर्क के विस्तार तथा ई-बस, ई-ऑटो और ई-रिक्शा जैसी स्वच्छ परिवहन सुविधाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए चार्जिंग नेटवर्क बढ़ाने और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की योजना भी बनाई गई है। इसका लक्ष्य निजी वाहनों पर निर्भरता कम करके लोगों को सार्वजनिक और स्वच्छ परिवहन की ओर आकर्षित करना है।

47 प्रदूषण हॉटस्पॉट के आसपास धूल पर भी कार्रवाई

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए हॉटस्पॉट आधारित रणनीति के तहत सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। पीडब्ल्यूडी ने 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट के आसपास करीब 3 किलोमीटर के दायरे में धूल के स्रोतों की पहचान कर कार्रवाई की योजना बनाई है। इसमें सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियां और खुले क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इसके साथ ही दिल्ली का नया इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर एआई, सीसीटीवी और जीपीएस आधारित निगरानी के जरिए प्रदूषण स्रोतों पर नजर रखेगा। 700 से अधिक निर्माण स्थलों को भी निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की जानकारी दी गई है।

दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को तकनीक के जरिए बेहतर बनाने के लिए केंद्र ने ₹1,789.52 करोड़ की लागत वाले Intelligent Traffic Management System को मंजूरी दी है। यह सिस्टम 42 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर को तीन चरणों में कवर करेगा और इसमें एआई आधारित एडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल, तकनीकी निगरानी और रियल-टाइम ट्रैफिक जानकारी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने, ट्रैफिक सिग्नल को परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित करने और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रदूषण नियंत्रण और ट्रांसपोर्ट सुधार को जोड़ने की कोशिश

दिल्ली के नए एक्शन प्लान में प्रदूषण और ट्रैफिक को अलग-अलग समस्याओं के बजाय आपस में जुड़ी चुनौतियों के रूप में देखने की कोशिश की जा रही है। जाम कम होने से वाहनों के लंबे समय तक इंजन चालू रहने और ईंधन खपत को घटाने में मदद मिल सकती है। वहीं बेहतर सार्वजनिक परिवहन से निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य है।

अब 62 हॉटस्पॉट पर जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की निगरानी कितनी प्रभावी रहती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। योजना का मुख्य फोकस स्थानीय समस्याओं की पहचान, विभागों के बीच समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई पर है।