दिल्ली शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल खुद करेंगे पैरवी—राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल

दिल्ली शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल खुद करेंगे पैरवी—राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल

नई दिल्ली,  06 अप्रैल 2026 । दिल्ली शराब नीति से जुड़े चर्चित घोटाला मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बड़ा फैसला लेते हुए खुद अपनी पैरवी करने का निर्णय लिया है। इस कदम के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

दिल्ली शराब घोटाला मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केजरीवाल ने इस केस की जज स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को अलग (recuse) करने की मांग की। कहा कि वे खुद दलीलें रखेंगे। अभी तक मैंने किसी को भी अपना वकालतनामा नहीं दिया है।

जस्टिस शर्मा ने इस अर्जी को रिकॉर्ड पर लेते हुए इसकी सुनवाई 13 अप्रैल के लिए तय की। साथ ही CBI को कल तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि अन्य कोई पक्ष भी यदि ऐसी अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है।

CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उसने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को शराब घोटाले केस में बरी कर दिया था।

केजरीवाल पत्नी सुनीता के साथ सुबह 11 बजे कोर्ट रूम पहुंचे थे। सुनवाई दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई। यह सिर्फ 9 मिनट चली।

सूत्रों के मुताबिक, केजरीवाल अदालत में अपने पक्ष को सीधे रखने की तैयारी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वह इस केस में अपनी बात मजबूती से पेश करना चाहते हैं और आरोपों का जवाब खुद देना चाहते हैं। यह कदम उनकी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिससे वे मामले को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर संभाल सकें।

दिल्ली शराब नीति केस पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस मामले में कई एजेंसियां जांच कर रही हैं और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का खुद कोर्ट में उतरना इस केस को और हाई-प्रोफाइल बना सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल का यह फैसला जनता के बीच एक मजबूत संदेश देने की कोशिश हो सकता है, जिससे वे खुद को निर्दोष साबित करने के लिए सीधे सामने आ सकें। वहीं विपक्ष इस मामले को लेकर लगातार हमला बोल रहा है और जवाबदेही की मांग कर रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आरोपी का खुद अपनी पैरवी करना असामान्य नहीं है, लेकिन इतने बड़े और संवेदनशील मामले में यह कदम काफी अहम माना जाएगा। इससे कोर्ट की कार्यवाही में भी अलग तरह की बहस देखने को मिल सकती है।

फिलहाल, सभी की नजरें इस केस की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल किस तरह अपने पक्ष को अदालत में रखते हैं।