बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आंदोलन के नेता जरांगे को लगाई फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आंदोलन के नेता जरांगे को लगाई फटकार

नई दिल्ली,02 सितंबर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन जारी रखने पर मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे को फटकार लगाई। कोर्ट ने जरांगे और सभी प्रदर्शनकारियों को आज दोपहर 3 बजे से पहले आजाद मैदान खाली करने का आदेश दिया था। इस मामले में अब फिर सुनवाई शुरू हो गई है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस (ACJ) श्री चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने कहा, "अगर 3 बजे तक आजाद मैदान खाली नहीं हुआ को प्रदर्शनकारियों पर कठोर जुर्माना, अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही और अन्य कार्रवाई की जाएगी।"

ACJ ने कहा- आप किसी हाईकोर्ट के जस्टिस को पैदल चलकर अदालत पहुंचने पर सिर्फ इसलिए मजबूर नहीं कर सकते क्योंकि आपके प्रदर्शनकारी सड़क पर नाच रहे थे। हम राज्य सरकार से भी जानना चाहते हैं कि वह क्या कर रही थी?

जरांगे 29 अगस्त से पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को 10% आरक्षण देने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। आज उनके आमरण अनशन का 5वां दिन है। सोमवार से जरांगे ने पानी पीना भी बंद कर दिया है।

सरकार की दुविधा

महाराष्ट्र सरकार लगातार इस मुद्दे पर समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। एक ओर मराठा समुदाय की मांग है कि उन्हें शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण दिया जाए, वहीं दूसरी ओर अदालत का साफ रुख है कि आरक्षण का प्रावधान संवैधानिक सीमा से बाहर नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि सरकार बार-बार कानून बनाने या संशोधन करने के प्रयासों में उलझी हुई है।

अदालत का स्पष्ट संदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने रुख में यह स्पष्ट कर दिया कि आंदोलन के नाम पर किसी भी तरह की अराजकता या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने जरांगे से कहा कि यदि वह आंदोलन करना चाहते हैं तो उसे शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में करना होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अगर आंदोलन से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई तो जिम्मेदारी आंदोलन नेताओं की ही होगी।

मराठा आरक्षण का भविष्य

मराठा समुदाय लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का हवाला देकर आरक्षण की मांग करता आ रहा है। अदालत और सरकार के बीच चल रही कानूनी और राजनीतिक जटिलताओं के बीच आंदोलन की दिशा और रणनीति भी प्रभावित होती है। जरांगे को मिली यह फटकार आंदोलन की रणनीति पर असर डाल सकती है और संभव है कि आने वाले दिनों में आंदोलन का तरीका बदले।

बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन को संवैधानिक दायरे में ही रहकर चलाना होगा। जरांगे और मराठा आंदोलन के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि मांग रखना उनका अधिकार है, लेकिन तरीका कानून के दायरे में होना चाहिए।