‘नॉर्थ पोल–साउथ पोल’ वाली राजनीति—शाह के बयान से गरमाया सियासी माहौल
नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026 । देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने एक जनसभा के दौरान कहा कि भारतीय जनता पार्टी और “हुमायूं” के विचारों में उतना ही अंतर है जितना नॉर्थ पोल और साउथ पोल में होता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
पश्चिम बंगाल में पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर के भाजपा से डील वाले वायरल वीडियो पर शुक्रवार को अमित शाह ने जवाब दिया। शाह कोलकाता में भाजपा का संकल्प पत्र लॉन्च करने पहुंचे थे। प्रेस कांफ्रेंस में उनसे हुमायूं के दावे पर सवाल हुआ।
शाह ने जवाब दिया- आप ममता जी की क्षमताओं से अनजान हो। वह ऐसे 2000 वीडियो बनवा सकती हैं। हुमायूं कबीर और भाजपा नॉर्थ पोल और साउथ पोल की तरह हैं। हम कभी साथ नहीं आ सकते। हम उन लोगों के साथ बैठने के बजाय अगले 20 साल तक विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे जो बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाते हैं।
हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाई है। उनका 19 मिनट का वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वे बीजेपी नेताओं के साथ ₹1000 करोड़ की डील पर चर्चा करते दिख रहे हैं। हालांकि, भास्कर इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।
शाह का यह बयान वैचारिक मतभेद को उजागर करने के उद्देश्य से दिया गया बताया जा रहा है। उनका संकेत यह था कि भाजपा की नीतियां और विचारधारा पूरी तरह अलग हैं और वे किसी भी तरह से उस विचारधारा से मेल नहीं खातीं, जिसका उन्होंने जिक्र किया। हालांकि, “हुमायूं” शब्द को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विपक्षी दलों ने इस बयान की आलोचना करते हुए इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाला बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के बयान देश की सामाजिक एकता को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह केवल वैचारिक अंतर को स्पष्ट करने का एक उदाहरण है और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं, जिनका उद्देश्य अपने समर्थकों को मजबूत करना और विपक्ष को घेरना होता है। ऐसे बयान अक्सर राजनीतिक विमर्श को तेज कर देते हैं और मीडिया व जनता के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं।
अमित शाह का यह बयान एक बार फिर यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में शब्दों और प्रतीकों का कितना बड़ा महत्व है। आने वाले दिनों में इस बयान के राजनीतिक प्रभाव और प्रतिक्रियाओं पर सबकी नजर बनी रहेगी।


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