पंजाब में मेडिकल स्टोर बंद करने की कॉल के बीच बड़ा फैसला, दवा कारोबारियों और मरीजों को मिली राहत

पंजाब में मेडिकल स्टोर बंद करने की कॉल के बीच बड़ा फैसला, दवा कारोबारियों और मरीजों को मिली राहत

पंजाब , 11 मई 2026 । पंजाब में 20 मई को मेडिकल स्टोर बंद रखने की दी गई कॉल के बीच बड़ा फैसला सामने आया है, जिससे दवा कारोबारियों और आम मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। लंबे समय से दवा विक्रेताओं और प्रशासन के बीच विभिन्न नियमों, लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं और ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़े मुद्दों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी के विरोध में कुछ संगठनों ने मेडिकल स्टोर बंद रखने का ऐलान किया था, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।

प्रधान अशोक गोयल ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा दी गई बंद की कॉल न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि जनहित के भी खिलाफ है। उन्होंने साफ कहा कि दवाइयां और स्वास्थ्य सेवाएं एमरजेंसी सेवाओं में आती हैं और इन्हें बंद करना मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है। वर्किंग प्रधान राज कुमार शर्मा और महासचिव मनमोहन सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ और लीडरी चमकाने के लिए केमिस्ट समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे तत्वों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।

हालांकि ताजा घटनाक्रम में सरकार और संबंधित संगठनों के बीच बातचीत के बाद कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने दवा विक्रेताओं की कुछ प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है, जिसके बाद बंद को लेकर स्थिति में नरमी आई है। इस फैसले से मरीजों को आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

दवा विक्रेताओं का कहना था कि नई नीतियों और नियमों के कारण छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं सरकार का तर्क है कि दवा वितरण प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नियमों का पालन जरूरी है। दोनों पक्षों के बीच चली बातचीत के बाद अब समाधान की दिशा में कदम बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल स्टोर बंद होने की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को होती। इसलिए सरकार और संगठनों के बीच समझौता बेहद जरूरी था। इस पूरे घटनाक्रम पर अब लोगों की नजर बनी हुई है कि 20 मई को बंद पूरी तरह वापस लिया जाएगा या सीमित रूप में विरोध जारी रहेगा।

राज्य में इस मुद्दे ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा भी तेज कर दी है। विपक्षी दल सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दबाव बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सरकार का दावा है कि वह जनता और कारोबारियों दोनों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है।