राहुल गांधी का हमला—‘VB-GRAM-G जुमला है, गरीबों के हक पर सीधा हमला’, सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026 । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की VB-GRAM-G योजना को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “जुमला” करार देते हुए कहा कि यह योजना दिखावे की ज्यादा और गरीबों के हक पर हमला करने वाली है। राहुल के मुताबिक, सरकार बड़े-बड़े नामों और प्रचार के जरिए योजनाओं को सफल बताने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग को वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली में कहा कि वे VB-GRAM-G बिल के बारे में नहीं जानते। उन्होंने कहा, ‘VB-GRAM-G’ जुमला है, गरीबों के हक पर हमला है। राहुल ने गरीबों से अपील की कि वे इस नए बिल के विरोध में एकजुट हों।
राहुल रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में राहुल और खड़गे ने सिर पर गमछा बांधा, कंधे पर कुदाल रखी और देशभर से मजदूरों की लाई मिट्टी पौधों में डाली।
सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि सरकार का मनरेगा को निरस्त करना महात्मा गांधी के नाम को लोगों की स्मृति से मिटाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संसद के आगामी बजट सत्र में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों का असर सीधे तौर पर गरीबों की जेब और अधिकारों पर पड़ रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और ग्रामीण संकट का जिक्र करते हुए राहुल ने दावा किया कि विकास के नाम पर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर योजनाएं सच में प्रभावी हैं, तो फिर गांवों से शहरों की ओर पलायन क्यों बढ़ रहा है और युवाओं को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा।
राहुल गांधी ने सरकार से मांग की कि VB-GRAM-G समेत सभी ग्रामीण योजनाओं की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए और यह साफ किया जाए कि वास्तविक लाभार्थियों को क्या मिला। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की सोच गांव, गरीब और किसान को केंद्र में रखकर नीतियां बनाने की है, न कि सिर्फ आंकड़ों और प्रचार के सहारे सफलता दिखाने की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान आगामी चुनावी माहौल में ग्रामीण वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, सत्तापक्ष समर्थक इसे विपक्ष की राजनीति बता रहे हैं। हालांकि, इस बयान ने एक बार फिर ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


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