महिला आरक्षण पर अखिलेश का सरकार पर निशाना: “लागू करें या मानें कि महिलाओं के खिलाफ हैं”

महिला आरक्षण पर अखिलेश का सरकार पर निशाना: “लागू करें या मानें कि महिलाओं के खिलाफ हैं”

लखनऊ, 05 मई 2026 । समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार को या तो तुरंत महिला आरक्षण लागू करना चाहिए, या फिर यह स्वीकार करना चाहिए कि वह महिलाओं के हितों के खिलाफ खड़ी है।

उन्होंने पोस्ट में कहा, "पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) की मांग है कि जो 'महिला आरक्षण' समस्त विपक्ष ने मिलकर संसद में सहर्ष पास किया है उसे 2027 के उप्र विधानसभा चुनाव में लागू करने की घोषणा भाजपा सरकार तत्काल करे या कह दे कि पुरुषवादी भाजपाई और उनके सामंती संगी-साथी महिलाओं को आरक्षण के खिलाफ हैं।" यादव ने कहा, "जब तक यह घोषणा नहीं होगी तब तक हम यह बात हर हफ़्ते जगह-जगह उठाते रहेंगे।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि लंबे समय से महिला आरक्षण का मुद्दा लंबित है, लेकिन इसे लागू करने को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाएं और वादे काफी नहीं हैं, बल्कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उनके मुताबिक, संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से ही वास्तविक समानता और सशक्तिकरण संभव है।

साल 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन प्रक्रिया के बाद 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को 'लागू करने' के लिए लोकसभा सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 किया जाना था। इसके अलावा महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जानी थीं। इस सिलसिले में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पिछली 17 अप्रैल को संसद में पारित नहीं हो सका था। उसके बाद से भाजपा लगातार विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावों के मद्देनजर महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से राजनीति में चर्चा का केंद्र रहा है और इसे लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद भी देखने को मिलते रहे हैं।