अनिल अंबानी ग्रुप की ₹1120 करोड़ की प्रॉपर्टीज अटैच — ईडी की बड़ी कार्रवाई पर विस्तृत फोकस
नई दिल्ली, 06 दिसंबर 2025 । अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कड़ी कार्रवाई हुई है। मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मामलों की जांच के तहत एजेंसी ने ग्रुप से जुड़ी कुल ₹1120 करोड़ की नई संपत्तियाँ अटैच कर ली हैं। यह जब्ती पिछले कुछ महीनों में की गई कार्रवाई का विस्तार है, जिससे अब कुल अटैच संपत्तियों का आंकड़ा ₹10,000 करोड़ से अधिक हो गया है।
प्रवर्तन निदेशालन (ED) ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों की 1,120 करोड़ रुपए की नई संपत्तियां अटैच की हैं। इसके साथ ही समूह के खिलाफ अब तक 10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
ED के अनुसार, ताजा कार्रवाई में मुंबई के बॉलार्ड एस्टेट स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स डिपॉजिट (FD), बैंक बैलेंस और अनलिस्टेड निवेश सहित 18 संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं। इसके साथ ही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 7, रिलायंस पावर की 2 और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज की 9 संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं।
ED ने समूह की अन्य कंपनियों के FD और निवेश भी अटैच किए हैं, जिनमें रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फाई मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
इससे पहले बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मामलों में ईडी रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस की 8,997 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियां अटैच कर चुका है।
इससे पहले भी हो चुकी है कुर्की की कार्रवाई
इससे पहले ED ने 20 नवंबर को अनिल अंबानी से जुड़ी करीब 1,400 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टीज अटैच की थीं। ये प्रॉपर्टीज नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर में स्थित हैं। वहीं 3 नवंबर को फंड डायवर्जन मामले में अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 132 एकड़ जमीन को अटैच किया था। यह जमीन धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) नवी मुंबई में है, जिसकी वैल्यू 4,462.81 करोड़ रुपए है।
ED ने जांच में पाया था कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ है। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था, लेकिन दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए।
ED ने जांच में पाया था कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ है। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था, लेकिन दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए।


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