दिलजीत दोसांझ के कनाडा कॉन्सर्ट में हंगामे पर BJP नेता RP Singh का बड़ा हमला, खालिस्तानी समर्थकों को बताया भारत विरोधी

दिलजीत दोसांझ के कनाडा कॉन्सर्ट में हंगामे पर BJP नेता RP Singh का बड़ा हमला, खालिस्तानी समर्थकों को बताया भारत विरोधी

नई दिल्ली, 07 मई 2026 । पंजाबी सिंगर और अभिनेता Diljit Dosanjh के कनाडा में आयोजित कॉन्सर्ट के दौरान हुए हंगामे ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक नारेबाजी और झंडे लहराने की घटना सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता RP Singh ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विदेशों में बैठे खालिस्तानी समर्थक भारत की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे तत्वों को बढ़ावा देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

यह हमला किसी एक कलाकार पर नहीं, बल्कि पंजाबियत, भारत की एकता और उस सोच पर है जो पंजाब को तरक्की, शांति और भाईचारे से जोड़ती है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi से दिलजीत की मुलाकात के बाद इस तरह की घटनाओं का सामने आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यह साफ दर्शाता है कि अलगाववादी और भारत विरोधी तत्व उन पंजाबियों से डरे हुए हैं जो दुनिया के सामने भारत का मान बढ़ा रहे हैं।

RP Singh ने कहा कि संगीत और कला लोगों को जोड़ने का माध्यम हैं, लेकिन कुछ कट्टरपंथी समूह इन्हें राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा में लगातार भारत विरोधी गतिविधियों को हवा दी जा रही है, जिससे दोनों देशों के संबंधों पर भी असर पड़ रहा है। BJP नेता ने यह भी कहा कि भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कॉन्सर्ट के दौरान हुई इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई लोगों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि मनोरंजन कार्यक्रमों को राजनीतिक मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं दिलजीत दोसांझ की ओर से इस पूरे विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पिछले कुछ समय से कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर भारत और कनाडा के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने कलाकारों से ऐसे विवादित मुद्दों से दूरी बनाए रखने की अपील की है, जबकि कुछ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला दिया।