चीन का रिकॉर्ड व्यापारिक सफलता: ट्रेड सरप्लस पहली बार $1.19 ट्रिलियन के पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

चीन का रिकॉर्ड व्यापारिक सफलता: ट्रेड सरप्लस पहली बार $1.19 ट्रिलियन के पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

नई दिल्ली, 14 जनवरी 2026 । चीन ने 2025 में अपना ट्रेड सरप्लस रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचाया, जो लगभग $1.19 ट्रिलियन (करीब $1.2 ट्रिलियन) तक पहुंच गया — यह आंकड़ा पहली बार $1 ट्रिलियन की सीमा को पार करते हुए इतिहास में दर्ज हुआ है। चीन के इस रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अपनी मजबूत उपस्थिति को फिर से साबित किया है।

निया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन का ट्रेड सरप्लस रिकॉर्ड 1.19 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹100 लाख करोड़) पहुंच गया है। यह 2024 के मुकाबले 20% ज्यादा है। महंगाई को एडजस्ट करने के बाद भी यह दुनिया के किसी भी देश का दर्ज किया गया अब तक का सबसे बड़ा ट्रेड सरप्लस है।

चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स के डेटा के मुताबिक, अकेले दिसंबर महीने में ही चीन ने 114.14 बिलियन डॉलर (करीब 10.31 लाख करोड़ रुपए) का सरप्लस कमाया। यह चीन के इतिहास का तीसरा सबसे सफल महीना रहा। निर्यात और आयात के बीच के अंतर को ट्रेड सरप्लस कहते हैं।

दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका पहुंच रहा चीनी सामान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन पर 30% टैरिफ लगाए थे। इससे अमेरिका के साथ चीन का सीधा व्यापार तो कम हुआ, लेकिन चीनी कंपनियों ने इसका तोड़ निकाल लिया। चीनी फैक्ट्रियों ने दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य क्षेत्रों के जरिए अमेरिका में सामान रूट किया।

विदेशी सामानों के आयात को लगातार घटा रहा चीन

चीन की सरकार 'आत्मनिर्भरता' की नीति पर चल रही है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। अक्टूबर में घोषित 2030 तक के पांच साल के आर्थिक प्लान में भी इसी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। चीन ने 1993 के बाद से कभी भी ट्रेड डेफिसिट का सामना नहीं किया है। यह रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस चीन की वैश्विक आर्थिक पकड़ को दर्शाता है, लेकिन इससे संबंधित कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। जैसे कि घरेलू मांग को बढ़ाना, स्थानीय उद्योगों का संतुलन और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक तनाव को संभालना। चीन का यह आर्थिक मील का पत्थर, लगभग समान आकार के बड़े आर्थिक बाजारों (जैसे सऊदी अरब की GDP के करीब) के तुल्य है, और यह बताता है कि चीन वैश्विक व्यापार में अपने प्रभुत्व को और भी मज़बूत कर रहा है।