दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट के GPS से छेड़छाड़ का दावा, सुरक्षा एजेंसियों में अलर्ट

दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट के GPS से छेड़छाड़ का दावा, सुरक्षा एजेंसियों में अलर्ट

नई दिल्ली, 10 नवम्बर 2025 । दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट ने एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को शिकायत दी कि उड़ान के दौरान उसके GPS सिग्नल में इंटरफेरेंस यानी छेड़छाड़ जैसी स्थिति महसूस हुई। जैसे ही जानकारी मिली, एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं।

हालांकि किसी भी यात्री या विमान को नुकसान नहीं हुआ, लेकिन एविएशन से जुड़े अधिकारियों ने इस घटना को गंभीर खतरे की चेतावनी बताया है। GPS आधुनिक विमानन तकनीक का अहम हिस्सा है, और इसके जरिए नेविगेशन, लोकेशन डेटा, लैंडिंग अप्रोच और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट का बड़ा हिस्सा नियंत्रित होता है। ऐसे में ज़रा-सी छेड़छाड़ भी सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकती है।

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट ने एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को शिकायत दी कि उड़ान के दौरान उसके GPS सिग्नल में इंटरफेरेंस यानी छेड़छाड़ जैसी स्थिति महसूस हुई। जैसे ही जानकारी मिली, एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं।

हालांकि किसी भी यात्री या विमान को नुकसान नहीं हुआ, लेकिन एविएशन से जुड़े अधिकारियों ने इस घटना को गंभीर खतरे की चेतावनी बताया है। GPS आधुनिक विमानन तकनीक का अहम हिस्सा है, और इसके जरिए नेविगेशन, लोकेशन डेटा, लैंडिंग अप्रोच और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट का बड़ा हिस्सा नियंत्रित होता है। ऐसे में ज़रा-सी छेड़छाड़ भी सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकती है।

ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम पर भी असर पड़ा

GPS में छेड़छाड़ की वजह से ATS (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को भी देरी से मैसेज मिलने लगे। ऐसे में विमानों को दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कराने की जगह जयपुर और आसपास के हवाई अड्डों की ओर डायवर्ट कर दिया गया।

एयर ट्रैफिक बढ़ने से एयर स्पेस में विमानों की आपस में दूरी को बढ़ाया गया। इससे किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सका।

  • आशंका: सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े एक नामी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने ‘भास्कर’ को बताया कि अमेरिका से संचालित होने वाले GPS के सिविलियन सिग्नल की नकल करना पहले सिर्फ सैद्धांतिक लगता था, लेकिन अब यह बहुत आसानी से किया जा रहा है। आशंका है कि दिल्ली साजिश में हैकर्स को किसी विदेशी सरकार की मदद मिली, ये बड़ा खतरा है। आशंका है कि हाल की घटना में हैकर्स ने फेक सिग्नल ब्लास्ट (बड़ी संख्या में सिग्नल भेजना) किया। पायलटों को भ्रम हुआ, फिर ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम भी क्रैश हो गया। अमेरिकी सिविलियन GPS ओपन सीए सिग्नल देता है जिसे स्यूडो रैंडम नॉयज (पीआरएन) के आधार पर रिसीव किया जाता है। पीआरएन सिग्नल की कॉपी की जा सकती है। जबकि मिलिट्री ग्रेड GPS एनक्रिप्टेड होते हैं, यानी इनमें किसी का दखल नहीं होता।
  • खतरा: देश में सिविलियन विमानों के जीपीएस से छेड़छाड़ के मामले बढ़े हैं। DGCA ने हाल के महीनों में ऐसे 465 से ज्यादा फेक सिग्नल रिकॉर्ड किए। अब तक ज्यादातर घटनाएं जम्मू और अमृतसर जैसे सीमावर्ती इलाकों में दर्ज की गई हैं। अमेरिका अब सिविलियन सिग्नल के लिए भी चिमेरा सिग्नल डेवलप कर रहा है। जीपीएस-3 के ये सिग्नल एनक्रिप्टेड होने से सुरक्षित होंगे।
  • उपाय: इसरो का स्वदेशी सैटेलाइट सिस्टम ‘नाविक’ विमानन सुरक्षा बढ़ाएगा। अक्टूबर में इसके मानक तय हुए। यह पूरी तरह भारत के नियंत्रण में है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि नाविक उपयोग में होता तो दिल्ली एयरपोर्ट की हाल की घटना रोकी जा सकती थीं।

ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम पर भी असर पड़ा

GPS में छेड़छाड़ की वजह से ATS (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को भी देरी से मैसेज मिलने लगे। ऐसे में विमानों को दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कराने की जगह जयपुर और आसपास के हवाई अड्डों की ओर डायवर्ट कर दिया गया।

एयर ट्रैफिक बढ़ने से एयर स्पेस में विमानों की आपस में दूरी को बढ़ाया गया। इससे किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सका।

  • आशंका: सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े एक नामी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने ‘भास्कर’ को बताया कि अमेरिका से संचालित होने वाले GPS के सिविलियन सिग्नल की नकल करना पहले सिर्फ सैद्धांतिक लगता था, लेकिन अब यह बहुत आसानी से किया जा रहा है। आशंका है कि दिल्ली साजिश में हैकर्स को किसी विदेशी सरकार की मदद मिली, ये बड़ा खतरा है। आशंका है कि हाल की घटना में हैकर्स ने फेक सिग्नल ब्लास्ट (बड़ी संख्या में सिग्नल भेजना) किया। पायलटों को भ्रम हुआ, फिर ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम भी क्रैश हो गया। अमेरिकी सिविलियन GPS ओपन सीए सिग्नल देता है जिसे स्यूडो रैंडम नॉयज (पीआरएन) के आधार पर रिसीव किया जाता है। पीआरएन सिग्नल की कॉपी की जा सकती है। जबकि मिलिट्री ग्रेड GPS एनक्रिप्टेड होते हैं, यानी इनमें किसी का दखल नहीं होता।
  • खतरा: देश में सिविलियन विमानों के जीपीएस से छेड़छाड़ के मामले बढ़े हैं। DGCA ने हाल के महीनों में ऐसे 465 से ज्यादा फेक सिग्नल रिकॉर्ड किए। अब तक ज्यादातर घटनाएं जम्मू और अमृतसर जैसे सीमावर्ती इलाकों में दर्ज की गई हैं। अमेरिका अब सिविलियन सिग्नल के लिए भी चिमेरा सिग्नल डेवलप कर रहा है। जीपीएस-3 के ये सिग्नल एनक्रिप्टेड होने से सुरक्षित होंगे।
  • उपाय: इसरो का स्वदेशी सैटेलाइट सिस्टम ‘नाविक’ विमानन सुरक्षा बढ़ाएगा। अक्टूबर में इसके मानक तय हुए। यह पूरी तरह भारत के नियंत्रण में है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि नाविक उपयोग में होता तो दिल्ली एयरपोर्ट की हाल की घटना रोकी जा सकती थीं।