वैश्विक मंच पर विवाद—ईरान को परमाणु अप्रसार संधि में अहम भूमिका देने पर उठे सवाल
न्यूयॉर्क, 29 अप्रैल 2026 । ईरान को NPT से जुड़े एक महत्वपूर्ण मंच पर उपाध्यक्ष जैसी भूमिका दिए जाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। कई देशों और विश्लेषकों ने इस फैसले पर चिंता जताई है, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से मौजूद संदेहों के कारण।
यह फैसला न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में चल रहे NPT के 11वें रिव्यू कॉन्फ्रेंस में लिया गया। यह कॉन्फ्रेंस 5 साल में एक बार होती है।
सम्मेलन के अध्यक्ष और वियतनाम के राजदूत दो हुंग वियेत ने बताया कि ईरान का नाम ‘गुटनिरपेक्ष देशों के ग्रुप’ की तरफ से आया था। इस ग्रुप में भारत समेत 100 से भी ज्यादा देश हैं।
अमेरिका के एक अधिकारी क्रिस्टोफर येओ ने इसे NPT के लिए अपमान बताया। उनका कहना है कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में उसे इस संगठन का अहम पद देना सही नहीं है।
परमाणु अप्रसार संधि का उद्देश्य दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि ईरान पर पहले भी यूरेनियम संवर्धन और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में उसे इस तरह की जिम्मेदारी देना विरोधाभासी संदेश दे सकता है।
दूसरी ओर, कुछ देश इस फैसले का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय ढांचे में शामिल कर संवाद और निगरानी को मजबूत किया जा सकता है। उनका मानना है कि सहभागिता से पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने का रास्ता खुलेगा।
International Atomic Energy Agency (IAEA) की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यही संस्था सदस्य देशों के परमाणु कार्यक्रमों की निगरानी करती है। ईरान और IAEA के बीच पहले भी निरीक्षण और रिपोर्टिंग को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के प्रसार को लेकर चिंताएं पहले से ही बढ़ी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संतुलित और पारदर्शी रुख अपनाना होगा, ताकि वैश्विक सुरक्षा ढांचा कमजोर न पड़े।


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