हेली एम्बुलेंस सेवा बनी जीवनदायिनी, दूर-दराज के मरीजों को मिल रहा त्वरित इलाज

हेली एम्बुलेंस सेवा बनी जीवनदायिनी, दूर-दराज के मरीजों को मिल रहा त्वरित इलाज

उत्तराखंड , 23 अप्रैल 2026 । उत्तराखंड सरकार की पहल से शुरू की गई हेली एम्बुलेंस सेवा अब गंभीर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह सेवा तेजी से राहत पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है, जहां सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचना अक्सर मुश्किल और समय लेने वाला होता है।

उत्तरकाशी के जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्र प्रभारी शार्दूल गुसाईं ने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती एक रोगी हेमंती पत्नी आलेंद्र सिंह नेगी निवासी ग्राम पटारा तहसील डुंडा को दूसरी बार गर्भावस्था में है। महिला के पेट में बहुत गंभीर संक्रमण होने के कारण चिकित्सकों द्वारा हेली एंबुलेंस के माध्यम से रेफर किए जाने की सलाह दी गई। जिसके द्दष्टिगत परिजनों द्वारा हेली एंबुलेंस का अनुरोध किया गया। इस पर जिला प्रशासन द्वारा हैली की मांग कर उक्त महिला पेशेंट को एयर हेली एंबुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश के लिए भेजा गया है।

राज्य के कई दूरस्थ इलाकों में मरीजों को पहले इलाज के लिए घंटों या कभी-कभी पूरे दिन का सफर तय करना पड़ता था। लेकिन अब हेली एम्बुलेंस की मदद से गंभीर हालत वाले मरीजों को कुछ ही समय में बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे उनकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ गई है।

सरकार के अनुसार, इस सेवा के तहत आपातकालीन स्थितियों—जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं और गंभीर दुर्घटनाएं—में तुरंत हवाई परिवहन की सुविधा दी जा रही है। इससे “गोल्डन आवर” में इलाज संभव हो पा रहा है, जो किसी भी गंभीर मरीज के लिए बेहद अहम होता है।

हेली एम्बुलेंस सेवा के संचालन के लिए राज्य सरकार ने आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं, जिनमें प्रशिक्षित डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद रहते हैं। इससे मरीज को उड़ान के दौरान ही प्राथमिक उपचार मिल जाता है।

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ उन गांवों और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को मिल रहा है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस सेवा को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और इसे जीवन रक्षक कदम बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस सेवा का विस्तार और बेहतर समन्वय के साथ किया जाए, तो यह मॉडल अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।