अदालतों में वकीलों की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, दफ्तरों में तैनात 285 लीगल अफसरों की होगी वापसी
चंडीगढ़ , 16 मई 2026 । न्यायिक व्यवस्था में बढ़ते लंबित मामलों और अदालतों में वकीलों की कमी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सरकारी विभागों और कार्यालयों में तैनात लीगल अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए 285 लीगल अफसरों को तत्काल प्रभाव से वापस अदालतों में भेजने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालतें खाली पड़ी हैं जबकि प्रशिक्षित वकीलों और कानूनी अधिकारियों को दफ्तरों में बाबू की तरह काम कराया जा रहा है।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि विभिन्न विभागों, बोडौँ और निगमों में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए 285 जिला अटार्नी, डिप्टी जिला अटार्नी और सहायक जिला अटार्नी को तत्काल प्रभाव से वापस बुलाकर एक सप्ताह के भीतर जिला अदालतों में तैनात किया जाए।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि बड़ी संख्या में लीगल अफसर प्रशासनिक और फाइल संबंधी कार्यों में लगाए गए हैं, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। कोर्ट का मानना है कि जिन अधिकारियों की नियुक्ति कानूनी मामलों और अदालतों में पैरवी के लिए की गई थी, उन्हें गैर-जरूरी दफ्तरी कार्यों में लगाना न्यायिक व्यवस्था के उद्देश्य के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए योग्य कानूनी अधिकारियों की अदालतों में मौजूदगी जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और सुनवाई में हो रही देरी आम लोगों के न्याय पाने के अधिकार को प्रभावित कर रही है।
सूत्रों के अनुसार जिन 285 लीगल अफसरों की वापसी के आदेश दिए गए हैं, वे लंबे समय से विभिन्न विभागों में प्रशासनिक कार्य देख रहे थे। अब उन्हें फिर से न्यायालयों में पैरवी और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े कार्यों में लगाया जाएगा। इस फैसले के बाद सरकारी विभागों में भी हलचल तेज हो गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे अदालतों में मामलों की सुनवाई तेज होने और सरकारी पक्ष की बेहतर पैरवी होने की उम्मीद जताई जा रही है।


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