अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद में JDU ने ललन सिंह को सौंपी जिम्मेदारी

अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद में JDU ने ललन सिंह को सौंपी जिम्मेदारी

पटना, 07 अक्टूबर 2026 । बिहार में विधान परिषद चुनाव के बीच जनता दल यूनाइटेड के अंदर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुका है। मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर विरोध का रुख अपनाया था। इसके बाद पार्टी ने विवाद को शांत कराने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री और मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को दी।

JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि मामला ललन सिंह के लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए दोनों नेताओं के बीच बातचीत कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई। हालांकि, बाद में ललन सिंह ने खुद कहा कि वह किसी के झगड़े में नहीं पड़ते, लेकिन दोनों पक्ष तैयार हों तो समझौता कराने में मदद कर सकते हैं।

पार्टी अनुशासन बनाम सरकार का गठन

नीतीश कुमार के बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जब राज्य की सत्ता बीजेपी को हैंडओवर की जा रही थी और सम्राट चौधरी को सीएम बनाया जा रहा था तो याद कीजिए उस वक्त पार्टी कार्यालय में काफी तोड़-फोड़ हुई थी। खाने की प्लेट, मेजें, कुर्सियां तोड़ी गईं और ललन सिंह और संजय झा के विरुद्ध नारे लगे। मगर, अनुशासन के नाम पर हुआ क्या?

विवाद उस समय बढ़ा जब अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से JDU उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन में पहुंचकर उनका समर्थन किया।

इतना ही नहीं, अनंत सिंह ने नीरज कुमार को हराने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही। इससे JDU के लिए स्थिति असहज हो गई, क्योंकि नीरज कुमार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं। ऐसे में पार्टी के एक मौजूदा विधायक का अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ खड़ा होना संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी रणनीति दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया।

संजय झा ने ललन सिंह को ही जिम्मेदारी क्यों दी?

संजय झा के मुताबिक, अनंत सिंह और नीरज कुमार दोनों का राजनीतिक क्षेत्र ललन सिंह के मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में आता है। इसलिए पार्टी ने ललन सिंह को दोनों नेताओं से बात कर विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी दी।

संजय झा ने कहा था कि पार्टी को पूरे मामले की जानकारी है और ललन सिंह से बातचीत कर समाधान निकालने को कहा गया है। यानी इसे सिर्फ व्यक्तिगत विवाद मानने के बजाय पार्टी ने संगठन के स्तर पर इसे सुलझाने की कोशिश की।

इसके पीछे एक और राजनीतिक पहलू भी है। ललन सिंह और अनंत सिंह के बीच लंबे समय से राजनीतिक संपर्क और निकटता रही है। 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी ललन सिंह ने मोकामा में अनंत सिंह के पक्ष में प्रचार किया था। ऐसे में पार्टी को उम्मीद थी कि ललन सिंह अनंत सिंह से सीधे बातचीत कर सकते हैं।

जब शुरुआत में मीडिया ने ललन सिंह से अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद को लेकर सवाल किया था, तब उन्होंने इसे दोनों नेताओं का मामला बताते हुए सीधे जवाब देने से परहेज किया था।

बाद में पार्टी की ओर से औपचारिक जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उनकी भूमिका बदली। ललन सिंह ने अनंत सिंह से बातचीत की और विवाद को सार्वजनिक बयानबाजी से आगे न बढ़ाने पर चर्चा की।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि संजय झा ने मामले से पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ा था, बल्कि संगठन के स्तर पर विवाद को संभालने के लिए स्थानीय राजनीतिक समीकरण वाले वरिष्ठ नेता को आगे किया गया था।

ललन सिंह ने 5 अक्टूबर को बताया कि उनकी अनंत सिंह से बातचीत हुई है। उनके मुताबिक, अनंत सिंह अब नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से ऐसी बयानबाजी नहीं करेंगे जिससे पार्टी को नुकसान हो।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अनंत सिंह ने नीरज कुमार का समर्थन करने की घोषणा कर दी है। ललन सिंह के अनुसार, अनंत सिंह अपनी शिकायतों पर कायम हैं और उन्होंने अपने रुख की वजह भी बताई है।

अनंत सिंह ने क्यों जताई नाराजगी?

ललन सिंह के मुताबिक, अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ अभियान चलाया गया और नीरज कुमार भी उनके विरोध में सक्रिय थे। अनंत सिंह का कहना है कि जब उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पार्टी का साथ दिया था, तब भी उन्हें चुनाव के समय विरोध का सामना करना पड़ा।

ललन सिंह ने यह भी कहा कि अगर किसी तरफ से कोई कार्रवाई हुई है तो उसकी प्रतिक्रिया भी हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि अनंत सिंह के खिलाफ अभियान के दौरान पार्टी की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं हुई।

हालांकि, ये बातें ललन सिंह और अनंत सिंह के पक्ष से सामने आए दावे हैं। इन आरोपों पर नीरज कुमार का पक्ष अलग हो सकता है और पूरे विवाद को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

6 अक्टूबर को जब संजय झा से ललन सिंह की भूमिका को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने पार्टी के हित में काम किया है। उन्होंने विवाद पर ज्यादा विस्तार में जाने से परहेज किया।

यानी पार्टी नेतृत्व का फिलहाल फोकस विवाद को और बढ़ाने के बजाय चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर दिखाई देता है। पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।

JDU के लिए क्यों अहम है यह विवाद?

बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। इनमें पटना स्नातक सीट भी शामिल है। ऐसे समय में पार्टी के विधायक और अधिकृत उम्मीदवार के बीच खुला मतभेद JDU के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती बन गया था।

अब ललन सिंह की मध्यस्थता के बाद अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से नीरज कुमार के खिलाफ बयानबाजी नहीं करने पर सहमति जताई है। हालांकि, उन्होंने नीरज कुमार के समर्थन का ऐलान नहीं किया है।

इसलिए फिलहाल विवाद पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन पार्टी ने सार्वजनिक टकराव को सीमित करने की दिशा में एक कदम जरूर उठाया है।