सिरौली कलां से किच्छा तक बदले सियासी समीकरण, स्थानीय निकाय चुनाव में BJP को नहीं मिली कामयाबी

सिरौली कलां से किच्छा तक बदले सियासी समीकरण, स्थानीय निकाय चुनाव में BJP को नहीं मिली कामयाबी

देहरादून, 14 अक्टूबर 2026 । उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऊधम सिंह नगर जिले का सिरौली कलां राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की जीत और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने इस क्षेत्र को सुर्खियों में ला दिया है। अदालत के आदेश के बाद 7 अक्टूबर 2026 को किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिकाओं में मतगणना हुई, जिसमें दोनों जगह कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इस नतीजे को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बता दें कि सरकार की और से किच्छा नगर पालिका के कुछ वार्डों और गांवों को पालिका में शामिल किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। बाद में सरकार ने इन क्षेत्रों को दोबारा नगर पालिका में शामिल किया। इसके बाद चुनाव को लेकर विवाद सामने आया। सिरोली को 2021 में एक अलग 'नगर पंचायत' के रूप में बनाने का सरकार ने फैसला लिया, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया और कोर्ट की शरण ली।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कैसे बदला घटनाक्रम?

सिरौली कलां के स्थानीय निकाय का दर्जा और किच्छा नगरपालिका के साथ उसके संबंध को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। राज्य सरकार ने पहले सिरौली कलां को अलग नगर निकाय बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे स्थानीय स्तर पर चुनौती दी गई। मामला अदालत तक पहुंचा और इसके बाद निकायों की सीमाओं तथा चुनावी प्रक्रिया को लेकर कानूनी विवाद सामने आया।

सितंबर 2026 में दोनों निकायों के लिए मतदान कराया गया, लेकिन मतगणना में देरी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अदालत के निर्देश के बाद 7 अक्टूबर को मतगणना कराई गई और दोनों निकायों के नतीजे घोषित हुए।

सिरौली कलां में राशिदा बेगम की जीत, किच्छा में भी कांग्रेस का कब्जा

सिरौली कलां नगर पालिका अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की राशिदा बेगम ने जीत हासिल की। उन्हें 5,434 वोट मिले, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार फरहीन जहां को 3,661 वोट प्राप्त हुए। इस तरह राशिदा बेगम ने 1,773 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। 

वहीं, किच्छा नगर पालिका में कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह ने भाजपा के संदीप अरोड़ा को हराया। राजेश प्रताप सिंह को 19,508 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 13,431 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर 6,077 वोट रहा। ध्यान देने वाली बात यह है कि सिरौली कलां में भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था, इसलिए वहां कांग्रेस की जीत को भाजपा के साथ सीधे चुनावी मुकाबले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP के सामने क्या चुनौती है?

सिरौली कलां और किच्छा के नतीजे स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करते हैं। हालांकि, नगर पालिका चुनावों के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। विधानसभा चुनाव में स्थानीय नेतृत्व, उम्मीदवारों, विकास कार्यों, रोजगार, कानून-व्यवस्था और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों की भी अहम भूमिका रहती है।

सिरौली कलां की राजनीतिक अहमियत उसके प्रशासनिक दर्जे, परिसीमन और स्थानीय मतदाता समीकरणों से भी जुड़ी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा और कांग्रेस आगामी महीनों में क्षेत्र में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं।