UAE से यूरोप तक पीएम मोदी का बड़ा कूटनीतिक दौरा, 5 देशों की यात्रा से वैश्विक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

UAE से यूरोप तक पीएम मोदी का बड़ा कूटनीतिक दौरा, 5 देशों की यात्रा से वैश्विक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

नई दिल्ली, 12 मई 2026 । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही यूएई से लेकर यूरोप तक फैले 5 देशों के महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर जाने वाले हैं। प्रधानमंत्री की यह यात्रा कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। इस दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी का पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) होगा, जहां वह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर वार्ता करेंगे। इस बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा। गौरतलब है कि यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और कल्याण पर भी विशेष चर्चा की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहने वाला है, जिसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें शामिल होंगी। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत के वैश्विक संबंधों को और मजबूत करना तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका को और प्रभावशाली बनाना माना जा रहा है।

United Arab Emirates की यात्रा के दौरान ऊर्जा, व्यापार और भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है। वहीं यूरोपीय देशों के दौरे में रक्षा, तकनीक, हरित ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा अहम मानी जा रही है। भारत और यूरोप के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक और सामरिक सहयोग तेजी से बढ़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। भारत खुद को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार सक्रिय है। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह बहु-देशीय यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को और मजबूत कर सकती है।

राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में इस दौरे को लेकर काफी चर्चा है। माना जा रहा है कि कई महत्वपूर्ण समझौतों और निवेश घोषणाओं की संभावना भी इस यात्रा के दौरान बन सकती है। विदेश नीति के नजरिए से यह दौरा आने वाले समय में भारत की रणनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।