“रिजिजू बोले: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इस मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव आएगा”

“रिजिजू बोले: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इस मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव आएगा”

नई दिल्ली । 21 जुलाई, 2025। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद के इसी मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव लाने के लिए 100 से ज्यादा सांसदों ने पहले ही एक नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, जो लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने की जरूरी सीमा से ज्यादा हैं।

रविवार को सर्वदलीय बैठक के बाद रिजिजू ने कहा- हस्ताक्षर प्रक्रिया चल रही है और यह पहले ही 100 से ज्यादा हो चुकी है। प्रस्ताव कब पेश किया जाएगा यह कार्य मंत्रणा समिति (कार्यदलों का ग्रुप जो अपने-अपने सदनों में एजेंडा को अंतिम रूप देता है) को तय करना है।

उन्होंने कहा- न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामला है, क्योंकि न्यायपालिका ही वह जगह है जहां लोगों को न्याय मिलता है। अगर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, तो यह सभी के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए यशवंत वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर सभी राजनीतिक दलों के हस्ताक्षर होने चाहिए।

दरअसल, जस्टिस वर्मा के लुटियंस स्थित बंगले पर 14 मार्च की रात 11:35 बजे आग लगी थी। इसे अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने बुझाया था। घटना के वक्त जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे। 21 मार्च को कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि जस्टिस वर्मा के घर से 15 करोड़ कैश मिला था। काफी नोट जल गए थे।

जस्टिस वर्मा को दोषी माना गया

22 मार्च को सीजेआई संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई। पैनल ने 4 मई को CJI को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया था।

रिपोर्ट के आधार पर ‘इन-हाउस प्रोसीजर’ के तहत CJI खन्ना ने सरकार से जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश की थी। जांच समिति में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधवालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज जस्टिस अनु शिवरामन थीं।

जस्टिस वर्मा ने याचिका में कहा है कि नोटों की बरामदगी पर समिति को इन 5 सवालों के जवाब देने चाहिए थे-

  1. बाहरी हिस्से में नकदी कब, कैसे और किसने रखी?
  2. कितनी नकदी रखी गई थी?
  3. नकदी असली थी या नहीं?
  4. आग लगने का कारण क्या था?
  5. क्या याचिकाकर्ता किसी भी तरह से 15 मार्च 2025 को ‘बची हुई नकदी’ को ‘हटाने’ के लिए जिम्मेदार था?