चंडीगढ़ , 29 अक्टूबर 2026 | हरियाणा में जमीन के मालिकाना हक के लिए लंबे समय से परेशान पात्र परिवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने दोहलीदार, बुटीमार, भोंडेदार और मुकररीदार को दान में मिली जमीन पर मालिकाना हक देने से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार अब उपमंडल अधिकारी नागरिक (SDM) को भी सौंप दिया है। इससे लोगों को हर मामले में उपायुक्त (DC) या जिला कलेक्टर के कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पात्र परिवार अपने क्षेत्र के SDM के समक्ष आवेदन कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना और जिला प्रशासन पर काम का बोझ कम करना है।
हरियाणा में दोहलीदार (गरीब ब्राह्मणों, पुजारियों और पुरोहितों), बुटीमार, भोंडेदार तथा मुकररीदार को दान में मिली जमीन का मालिकाना हक लेने के लिए अब उपायुक्त कार्यालयों में नहीं भटकना पड़ेगा।
प्रदेश सरकार ने 20 साल से इस जमीन पर काबिज परिवारों को मालिकाना हक देने का अधिकार उपमंडल अधिकारी नागरिक यानी एसडीएम को दे दिया है। अभी तक कलेक्टर (डीसी) के पास ही यह अधिकार था। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी एसडीएम, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा राजस्व कानूनों के तहत प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है। पात्र परिवार अब मालिकाना हक के लिए एसडीएम के समक्ष आवेदन कर सकेंगे। मालिकाना हक मिलने से वह जमीन को आगे किसी को भी बेच सकेंगे। निजी व्यक्ति और संस्थाओं को दान में मिली जमीन बेचने पर कोई रोक नहीं रहेगी।
किन लोगों को मिलेगा इस फैसले का लाभ?
यह फैसला मुख्य रूप से उन लोगों से संबंधित है, जिन्हें पुराने समय में दान या परंपरागत व्यवस्था के तहत जमीन मिली थी। इसमें चार श्रेणियां शामिल हैं:
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दोहलीदार: परंपरागत रूप से दान में जमीन प्राप्त करने वाले पुजारी, पुरोहित और अन्य पात्र व्यक्ति।
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बुटीमार: ऐसे लोग जिनका जमीन पर अधिकार पुराने राजस्व प्रावधानों और निर्धारित श्रेणी के तहत आता है।
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भोंडेदार: परंपरागत व्यवस्था के तहत जमीन पर अधिकार रखने वाले पात्र व्यक्ति।
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मुकररीदार: निर्धारित शर्तों के तहत जमीन पर अधिकार प्राप्त करने वाले लोग।
इन श्रेणियों में आने वाले सभी लोगों को स्वतः मालिकाना हक नहीं मिलेगा। संबंधित कानून, जमीन के रिकॉर्ड, कब्जे की अवधि और अन्य पात्रता शर्तों की जांच के बाद ही फैसला होगा।
20 साल से जमीन पर काबिज परिवारों के लिए क्या है नियम?
रिपोर्टों के मुताबिक, निर्धारित श्रेणियों के पात्र परिवारों के लिए जमीन पर 20 साल से अधिक समय से काबिज होने की शर्त महत्वपूर्ण है। ऐसे परिवार मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय संबंधित कानून और दस्तावेजों की जांच के आधार पर होगा।
आवेदकों को जमीन से जुड़े पुराने राजस्व रिकॉर्ड, कब्जे के प्रमाण और उपलब्ध दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। आवेदन से पहले संबंधित SDM कार्यालय या राजस्व विभाग से यह भी स्पष्ट कर लेना चाहिए कि उनके मामले में कौन-कौन से दस्तावेज और शर्तें लागू होंगी।
इससे पहले इन मामलों में कलेक्टर यानी DC के पास अधिकार होने के कारण कई लोगों को जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था। प्रशासनिक कामकाज के दबाव के चलते कुछ मामलों के निपटारे में देरी भी हो सकती थी।
अब राज्य सरकार ने राजस्व कानूनों के तहत प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में अधिसूचित SDM को भी संबंधित मामलों की सुनवाई का अधिकार दिया है। इससे लोग अपने उपमंडल स्तर पर आवेदन कर सकेंगे और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक सुलभ हो सकती है।
मालिकाना हक मिलने के बाद जमीन बेच सकेंगे पात्र परिवार
रिपोर्ट के अनुसार, पात्र परिवारों को जमीन का मालिकाना हक मिलने के बाद उसकी खरीद-फरोख्त का अधिकार भी मिल सकेगा। इससे उन परिवारों को लाभ हो सकता है, जो लंबे समय से जमीन पर खेती या अन्य अनुमत गतिविधियां कर रहे हैं, लेकिन मालिकाना हक स्पष्ट नहीं होने के कारण उसका स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल नहीं कर पाते।
हालांकि, जमीन बेचने या हस्तांतरित करने से पहले संबंधित आदेश, राजस्व रिकॉर्ड और लागू कानूनी शर्तों की पुष्टि करना जरूरी होगा। हर मामले में अधिकारों का दायरा जमीन की श्रेणी और स्वीकृत मालिकाना हक पर निर्भर करेगा।
हरियाणा सरकार का यह फैसला लंबित राजस्व मामलों को तेजी से निपटाने और आम लोगों की प्रशासनिक परेशानियां कम करने की दिशा में उठाया गया है। SDM स्तर पर सुनवाई होने से जिला कलेक्टर कार्यालयों पर निर्भरता कम हो सकती है। साथ ही, पात्र परिवारों को जमीन से संबंधित दस्तावेजों और मालिकाना हक के मामलों में स्थानीय स्तर पर समाधान पाने का अवसर मिलेगा।
अब संबंधित परिवारों को अपने जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराकर पात्रता के अनुसार आवेदन करना चाहिए। आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित SDM या राजस्व कार्यालय से की जा सकती है।