डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती बढ़ेगी—IT नियमों में बदलाव से ‘सेफ हार्बर’ पर खतरा, कंपनियों की जवाबदेही तय

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती बढ़ेगी—IT नियमों में बदलाव से ‘सेफ हार्बर’ पर खतरा, कंपनियों की जवाबदेही तय

नई दिल्ली, 31  मार्च 2026 । सरकार जल्द ही आईटी नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत निर्देशों का पालन न करने वाली कंपनियों का ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण खत्म किया जा सकता है। यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने और ऑनलाइन कंटेंट पर नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने आईटी नियमन- 2021 में बदलाव का नया मसौदा जारी कर दिया है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकारी निर्देशों की अनदेखी नहीं कर सकेंगे। उन्हें निर्देश, गाइडलाइन, एडवाइजरी माननी ही होगी। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित डिजिटल मीडिया कंपनियां सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराई जाएंगी।

इससे इन कंपनियों को सेफ हार्बर के तहत मिलने वाली कानूनी ढाल खत्म कर दी जाएगी। आईटी नियमों में सबसे अहम बदलाव यह है कि प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए हर कंटेंट के लिए खुद जिम्मेदार होंगे। फिलहाल 14 अप्रैल तक सरकार ने इस मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव, आपत्तियां मांगी हैं।

Information Technology Rules 2021 के तहत अभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ‘सेफ हार्बर’ का लाभ मिलता है, यानी यूजर द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कंपनियां सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं होतीं। लेकिन नए बदलावों के बाद अगर कंपनियां सरकारी निर्देशों या कानूनी आदेशों का पालन नहीं करतीं, तो यह सुरक्षा हटा दी जाएगी।

‘सेफ हार्बर’ खत्म होने का मतलब यह होगा कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक, भ्रामक या अवैध सामग्री के लिए कंपनी को सीधे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इससे कंपनियों पर कंटेंट मॉडरेशन को लेकर दबाव बढ़ेगा और उन्हें नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

सरकार का मानना है कि यह बदलाव फेक न्यूज, हेट स्पीच और साइबर क्राइम पर लगाम लगाने में मदद करेगा। वहीं, टेक कंपनियों का कहना है कि बहुत ज्यादा सख्ती से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है और प्लेटफॉर्म्स के संचालन में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में डिजिटल स्पेस में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन इसके साथ ही कंपनियों और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, आईटी नियमों में यह संभावित बदलाव भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, जहां प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।