₹10,000 से अधिक के ऑनलाइन पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड—फ्रॉड रोकने के लिए नया सुरक्षा कदम

₹10,000 से अधिक के ऑनलाइन पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड—फ्रॉड रोकने के लिए नया सुरक्षा कदम

नई दिल्ली,  10 अप्रैल 2026 । डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित बनाने के लिए एक नया प्रस्ताव सामने आया है, जिसके तहत ₹10,000 से अधिक के ऑनलाइन पेमेंट पर 1 घंटे का “कूलिंग पीरियड” या होल्ड लागू किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य बढ़ते साइबर फ्रॉड और अनधिकृत ट्रांजैक्शन को रोकना है।

जल्द ही ऐसा हो सकता है कि आपका ₹10 हजार से ज्यादा का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तुरंत न हो। उसमें 1 घंटे की देरी हो सकती है। इससे ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन रोकने या कैंसिल करने का मौका मिलेगा। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए RBI ने ये प्रस्ताव रखा है।

RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं, यह देरी उस दबाव को खत्म करेगी। फिलहाल ज्यादातर डिजिटल ट्रांजैक्शन तुरंत होते हैं, जिससे यूजर को सोचने या गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता।

Reserve Bank of India और संबंधित वित्तीय संस्थाएं इस तरह के सुरक्षा उपायों पर विचार कर रही हैं, ताकि ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके। खासतौर पर UPI और इंटरनेट बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के मामले भी तेजी से बढ़े हैं, जिससे ऐसे नियमों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

इस प्रस्ताव के अनुसार, ₹10,000 से अधिक की राशि ट्रांसफर करने पर वह तुरंत प्रोसेस नहीं होगी, बल्कि लगभग 1 घंटे के लिए होल्ड पर रहेगी। इस दौरान यदि उपयोगकर्ता को कोई संदेह होता है, तो वह ट्रांजैक्शन को कैंसिल कर सकता है। यह समय अवधि धोखाधड़ी के मामलों में पैसे को बचाने का महत्वपूर्ण मौका दे सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम विशेष रूप से नए पेयी (beneficiary) जोड़ने के बाद होने वाले ट्रांजैक्शन में अधिक प्रभावी होगा, जहां फ्रॉड की संभावना ज्यादा होती है। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इससे त्वरित भुगतान की सुविधा प्रभावित हो सकती है, खासकर आपातकालीन स्थितियों में।

डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म जैसे Google Pay, PhonePe और Paytm पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, जहां लाखों लोग रोजाना ट्रांजैक्शन करते हैं।

कुल मिलाकर, यह कदम सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अधिक सुरक्षित बना सकता है, लेकिन इसके साथ उपयोगकर्ताओं को नई प्रक्रिया के अनुसार खुद को ढालना भी होगा।