‘बाबरी जैसी मस्जिद’ निर्माण के लिए 11 पेटी चंदा—स्थानीय समुदाय की बड़ी भागीदारी और सामाजिक बहस तेज

‘बाबरी जैसी मस्जिद’ निर्माण के लिए 11 पेटी चंदा—स्थानीय समुदाय की बड़ी भागीदारी और सामाजिक बहस तेज

कोलकाता , 08 दिसंबर 2025 । एक स्थानीय पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तब पैदा कर दी जब खबर सामने आई कि ‘बाबरी जैसी मस्जिद’ के निर्माण के लिए समुदाय की ओर से 11 पेटी चंदा इकट्ठा किया गया है। यह संग्रहण किसी एक संगठन या संस्था द्वारा नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग तबकों की भागीदारी से हुआ बताया जा रहा है। चंदे की मात्रा, लोगों की सक्रिय भागीदारी और इसके पीछे की भावनाओं ने इस मुद्दे को सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखी। बाबरी विध्वंस की 33वीं बरसी पर इस मस्जिद की आधारशिला रखी गई। कबीर ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंच पर मौलवियों के साथ फीता काटकर औपचारिकता पूरी की।

अब इस मस्जिद के लिए जुटाए चंदे का एक वीडियो सामने आया है। हुमायूं कबीर ने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें कुछ लोग नोट गिनते नजर आ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि शिलान्यास समारोह में 11 पेटी चंदा इकट्‌ठा हुआ, जिसे गिनने के लिए 30 लोग और नोट गिनने की मशीन लगानी पड़ी।

हुमायूं का नया ऐलान- फरवरी में 1 लाख लोगों से कुरान पाठ कराएंगे

बंगाल में निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने रविवार को घोषणा की कि वह फरवरी में 1 लाख लोगों से कुरान का पाठ करवाएंगे। इसके बाद ही बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू होगा। हुमायूं ने कहा कि वे जल्द ही एक नई पार्टी बनाएंगे जो मुसलमानों के लिए काम करेगी। वे 135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा वे ओवैसी की पार्टी के संपर्क में हैं और अलायंस कर सकते हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह चंदा मस्जिद निर्माण के लिए लोगों की स्वैच्छिक योगदान का परिणाम है। कई व्यक्तियों, व्यापारियों और सामाजिक समूहों ने इसमें हिस्सा लिया, जिसके बाद कुल मिलाकर 11 पेटियाँ चंदे से भर पाईं। यह पहल किसी राजनीतिक या वैचारिक संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक ढांचे को पुनर्जीवित करने और अपने समुदाय की पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की गई बताई गई है।

हालाँकि, इस खबर के सामने आते ही कई तरह की प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गई हैं। एक वर्ग इसे धार्मिक संरचना के संरक्षण और समुदाय की एकजुटता का प्रतीक मान रहा है, वहीं कुछ लोग इसे संवेदनशील मुद्दों को फिर से हवा देने वाला कदम भी कह रहे हैं। सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक संरचनाएँ हमेशा से भावनाओं से जुड़ी रही हैं, इसलिए ऐसी कोई भी पहल व्यापक प्रतिक्रिया पैदा करती है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह चंदा संग्रह शांतिपूर्ण तरीके से और सार्वजनिक सहयोग के साथ हुआ। कोई विवाद, विरोध या असहमति की स्थिति सामने नहीं आई, जिससे संकेत मिलता है कि स्थानीय स्तर पर लोगों ने इसे एक सामाजिक और धार्मिक प्रयास के रूप में देखा।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है, क्या यह एक धार्मिक निर्माण तक सीमित रहती है या इस मुद्दे पर व्यापक सामाजिक बहस का आधार बनती है। फिलहाल, 11 पेटी चंदा इकट्ठा होने की खबर ने निश्चित रूप से समाज में नए विमर्श को जन्म दिया है।