3 साल में 3 गुना बढ़े 5–10 लाख कमाने वाले: भारत में मिडल-इनकम ग्रोथ का नया ट्रेंड
नई दिल्ली, 26 नवम्बर 2025 । भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले तीन वर्षों में एक दिलचस्प और महत्त्वपूर्ण ट्रेंड सामने आया है—5 से 10 लाख रुपये सालाना कमाने वाले लोगों की संख्या में लगभग तीन गुना वृद्धि। यह बदलाव सिर्फ आय के बढ़ने का संकेत नहीं है, बल्कि देश में उभरते मिडल-क्लास, तेज़ी से बढ़ते रोजगार अवसर, डिजिटल इकोनॉमी और स्किल-ड्रिवन नौकरियों के विस्तार का प्रमाण भी है।
केंद्र सरकार द्वारा आयकर छूट बढ़ाने से रिवर्स ट्रेंड देखने को मिल रहा है। इनकम टैक्स में छूट बढ़ने के बाद आशंका थी कि टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या और कुल रिटर्न कम हो जाएगा। लेकिन बीते 3 साल में 5 से 10 लाख आय वाले रिटर्न दाताओं की हिस्सेदारी 2.8 गुना बढ़ी है।
वित्त वर्ष 2023-24 में 5 लाख से 10 लाख की आय ब्रैकेट में 16.39% लोगों ने रिटर्न भरा था। इसी क्रम में 2024-25 में 37% लोगों ने रिटर्न भरा, जबकि 2025-26 में यह 46% हो चुका है।
बता दें कि 2025-26 से न्यू टैक्स रिजीम के तहत अब 12 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लेगा। नौकरीपेशा के लिए 75 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ यह छूट 12.75 लाख रुपए हो जाएगी।
पहली बार इनकम टैक्स कलेक्शन 25 लाख करोड़ रुपए पार होगा संसद में केंद्र ने बताया था कि 5 साल में कॉर्पोरेट, एचयूएफ और व्यक्तिगत आयकरदाताओं को 13.23 लाख करोड़ रुपए की छूट दी गई, लेकिन टैक्स कलेक्शन में गिरावट नहीं आई।
इस साल पहली बार कुल 25.2 लाख करोड़ के टैक्स संग्रह का लक्ष्य रखा है। यह 12.75 लाख तक की आय को करमुक्त करने के बाद भी बीते वर्ष के 22.26 लाख करोड़ से 13.36% ज्यादा है।
रिटर्न भरने वाले दो साल 2022-23 से 2023-24 के बीच में 1.39 करोड़ बढ़े हैं। इस वर्ष यह संख्या रिकॉर्ड 10 करोड़ पहुंच सकती है। 31 अक्टूबर तक यह संख्या 8 करोड़ को पार कर चुकी है। इसमें ऑडिट और कंपनी के रिटर्न शामिल नहीं हैं।


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