फ्लाइट के उड़ान भरने में 15 मिनट की देरी की होगी जांच — एयरलाइंस की जवाबदेही और यात्रियों की सुरक्षा पर कड़ा रुख

फ्लाइट के उड़ान भरने में 15 मिनट की देरी की होगी जांच — एयरलाइंस की जवाबदेही और यात्रियों की सुरक्षा पर कड़ा रुख

नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025 । एविएशन सेक्टर में यात्रियों की बढ़ती शिकायतों और समयपालन की गिरती दर को देखते हुए अब सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। नए निर्देशों के अनुसार, किसी भी फ्लाइट के उड़ान भरने में 15 मिनट से अधिक की देरी पर एयरलाइन को अनिवार्य रूप से कारण बताना होगा, और आवश्यकता पड़ने पर आधिकारिक जांच भी की जाएगी

यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में कई एयरलाइंस समय पर प्रस्थान नहीं कर पाईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। कई मामलों में देरी की जानकारी समय पर नहीं दी गई, और कुछ घटनाओं में यात्रियों को विमान में लंबा इंतजार करना पड़ा।

नई गाइडलाइन के तहत—

  • एयरलाइंस को हर देरी का रिकॉर्ड रखना होगा और उसे निदेशालय को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

  • 15 मिनट से ज्यादा डिले पर प्राथमिक जांच और ज़रूरत पड़ने पर विस्तृत जांच शुरू होगी।

  • तकनीकी खराबी, स्टाफ उपलब्धता, रनवे ट्रैफिक या अन्य कारणों की स्पष्ट जानकारी यात्रियों को तुरंत देनी होगी।

  • बार-बार देरी करने वाली एयरलाइंस पर जुर्माना और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई भी संभव है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय यात्रियों के अधिकारों को मजबूत करेगा, एयरलाइंस को अधिक जिम्मेदार बनाएगा और भारत की एविएशन सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाएगा।

12 पेज के नए आदेश के मुताबिक अब किसी भी निर्धारित उड़ान में तकनीकी कारण से 15 मिनट या उससे ज्यादा की देरी होती है तो उसकी जांच अनिवार्य होगी। कंपनी को बताना होगा कि देरी क्यों हुई? उसे कैसे ठीक किया गया? दोबारा न होने के लिए क्या उपाय किए? ये ऐसे प्रावधान हैं, जो पहले लागू नहीं थे।

कंपनी को किसी भी ‘मेजर डिफेक्ट’ की तुरंत सूचना डीजीसीए को फोन पर देनी होगी। 72 घंटे में विस्तार से रिपोर्ट भेजनी होगी। डिफेक्ट तीन बार दोहराए जाने पर उसे ‘रिपीटेटिव डिफेक्ट’ माना जाएगा और उस पर अलग से विशेष जांच शुरू होगी।

डीजीसीए ने यह सख्ती इसलिए की क्योंकि अब तक डिफेक्ट रिपोर्टिंग व्यवस्था कमजोर थी। अभी तक 15 मिनट की देरी की जांच जैसी व्यवस्था नहीं थी और रिपीट डिफेक्ट की परिभाषा भी नहीं थी।

सरकार का यह कड़ा रुख एक संकेत है कि अब 'ऑन-टाइम परफ़ॉर्मेंस' केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एयरलाइंस के मूल्यांकन का महत्वपूर्ण पैमाना बनेगा। यात्रियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, सरकार चाहती है कि हर उड़ान सुरक्षित, पारदर्शी और समय पर हो।