जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय स्वतंत्र विद्युत कर्मचारी महासंघ का विशाल धरना प्रदर्शन

जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय स्वतंत्र विद्युत कर्मचारी महासंघ का विशाल धरना प्रदर्शन
  • सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आवाज

नई दिल्ली। माननीय जे. एस. पाटील, राष्ट्रीय अध्यक्ष, स्वतंत्र मजदूर यूनियन के नेतृत्व में जंतर-मंतर, नई दिल्ली में अखिल भारतीय स्वतंत्र विद्युत कर्मचारी महासंघ द्वारा एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से आए बिजली क्षेत्र सहित अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, महिला श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। धरना शांतिपूर्ण रहा और श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता का सशक्त संदेश दिया गया।


धरना-प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के निजीकरण को तत्काल रोकने, श्रमिक-विरोधी कानूनों और नीतियों को वापस लेने तथा कर्मचारियों के सामाजिक-आर्थिक अधिकारों की बहाली की मांग करना था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से बिजली अधिनियम संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेने की जोरदार मांग की। उनका कहना था कि यह संशोधन बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों की नौकरी-सुरक्षा खतरे में पड़ेगी।
धरने में नई श्रम संहिताओं में शामिल मजदूर-विरोधी प्रावधानों को निरस्त करने की मांग उठी। यूनियन नेताओं ने कहा कि इन संहिताओं से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों के अधिकार कमजोर होते हैं। साथ ही, सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने और ईपीएस-95 पेंशन में सम्मानजनक संशोधन की मांग प्रमुख रही।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय व राज्य सेवाओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में रिक्त पदों के भारी बैकलॉग को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने, पदोन्नति में आरक्षण लागू करने तथा नचिअप्पन समिति की सिफारिशों के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग रखी। इसके साथ ही, आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाकर संविधान की नवमी अनुसूची में शामिल करने और उच्च पदों पर लैटरल एंट्री बंद करने की मांग भी की गई।
धरने में संविदा कर्मियों को समान काम-समान वेतन के आधार पर स्थायी रोजगार देने, तथा आंगनबाड़ी सेविका, आशा वर्कर्स, घरेलू कामगार, चाय बागान श्रमिक, कृषि मजदूर और निर्माण श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग उठी। इसके अलावा, मानव द्वारा मेल ढोने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने और सभी संबंधित कर्मचारियों को स्थायी रोजगार देने पर विशेष जोर दिया गया।


राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. पाटील ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमिकों की अनदेखी कर किए जा रहे सुधार देश के विकास के लिए घातक हैं। उन्होंने सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने और स्वतंत्र मजदूर यूनियन को मान्यता देने की मांग की। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर और तेज किया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि श्रमिक वर्ग अपने अधिकारों और सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए संगठित और सजग है, तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा।