बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, अल्पसंख्यक सुरक्षा पर फिर गहराए सवाल

बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, अल्पसंख्यक सुरक्षा पर फिर गहराए सवाल

ढाका, 13 जनवरी 2026 । बांग्लादेश में एक और हिंदू नागरिक की हत्या की खबर ने देश के अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और पड़ोसी देशों का ध्यान भी आकर्षित किया है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुरक्षा और न्याय मिल पा रहा है।

बांग्लादेश के दक्षिणी हिस्से चटगांव डिवीजन के फेनी जिला स्थित दागनभुइयां में रविवार रात अज्ञात बदमाशों ने 28 साल के हिंदू युवक समीर कुमार दास की पीट-पीटकर और चाकू मारकर हत्या कर दी। उसका ऑटोरिक्शा भी लूट लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, समीर रविवार शाम करीब 7 बजे ऑटोरिक्शा लेकर घर से निकला था। देर रात तक जब वह नहीं लौटा तो परिजन ने उसकी तलाश शुरू की। रात करीब 2 बजे जगतपुर गांव के एक खेत में स्थानीय लोगों को उसका शव मिला।

दागनभुइयां थाने के एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, समीर की हत्या में देसी हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। प्राथमिक जांच में लग रहा है कि हत्या पहले से प्लानिंग के तहत की गई थी। जांच जारी है और अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बांग्लादेश में 23 दिनों के दौरान हिंदू की हत्या की ये 7वीं घटना है। इससे पहले 5 जनवरी को बांग्लादेश के नरसिंदी जिले में एक हिंदू दुकानदार की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। मृतक 40 साल का शरत चक्रवर्ती मणि था।

हिंदू संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, धमकी और भेदभाव की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है या मामले दबा दिए जाते हैं, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है। इस ताजा घटना ने फिर से धार्मिक स्वतंत्रता और समान नागरिक अधिकारों पर बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हैं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने और राजनीतिक इच्छाशक्ति से भी जुड़ी हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि बांग्लादेश सरकार इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाते हैं।