रेवाड़ी में BJP का बड़ा संगठनात्मक एक्शन—चुनाव के बीच 15 नेताओं को 6 साल के लिए बाहर का रास्ता

रेवाड़ी में BJP का बड़ा संगठनात्मक एक्शन—चुनाव के बीच 15 नेताओं को 6 साल के लिए बाहर का रास्ता

रेवाड़ी , 02 मई 2026 । हरियाणा के रेवाड़ी में नगर परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी माहौल के बीच बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए 15 नेताओं को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई पार्टी अनुशासन को मजबूत करने और संगठन में एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई बताई जा रही है। इस फैसले को स्थानीय राजनीति में ‘संगठनात्मक धमाका’ माना जा रहा है, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण पार्टी लाइन के खिलाफ गतिविधियां, अनुशासनहीनता और चुनाव के दौरान बगावती रुख अपनाना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं पर आरोप था कि वे पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम कर रहे थे या फिर निर्दलीय रूप से चुनावी मैदान में उतरकर संगठन को नुकसान पहुंचा रहे थे।

निष्कासित किए गए नेताओं में धारूहेड़ा के निवर्तमान चेयरमैन कंवर सिंह और रेवाड़ी नगर परिषद की निवर्तमान चेयरपर्सन पूनम यादव, पूर्व पार्षद बलजीत यादव सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं। इनके अलावा अंजलि शर्मा, पूनम सतीजा, मनीष सैनी, राकेश बड़ीवाल, अनुराधा शर्मा, योगेश शर्मा, भवानी शंकर, बलवंत राय कौशिक, नवीन सैनी, सुधीर स्वामी, मनीष टिकानिया और अमृतकला टिकानिया को पार्टी से निष्कासित किया गया है।

पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनाव के समय अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। संगठन के भीतर असंतोष या बगावत को सख्ती से निपटाया जाएगा, ताकि पार्टी की छवि और चुनावी रणनीति पर कोई असर न पड़े।

इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। जिन नेताओं को निष्कासित किया गया है, उनके समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है, जो आगामी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है। वहीं, पार्टी के समर्थक इसे संगठन को मजबूत करने वाला कदम मान रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि अनुशासन और एकजुटता सर्वोपरि है। खासकर चुनावी समय में ऐसे कदम पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा होते हैं।

फिलहाल सभी की नजरें इस फैसले के असर पर टिकी हैं—क्या इससे BJP को फायदा होगा या स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ेगा, यह आने वाले चुनाव परिणामों में साफ हो जाएगा।