बंगाल स्ट्रॉन्गरूम विवाद पर सियासी बवाल, ममता बनर्जी का 3 घंटे का धरना—EVM सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली/कोलकाता, 01 मई 2026 । पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब स्ट्रॉन्गरूम (मतगणना केंद्रों में EVM और VVPAT मशीनों के भंडारण स्थल) की सुरक्षा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए। इस मुद्दे पर Mamata Banerjee ने कड़ा रुख अपनाते हुए करीब तीन घंटे तक धरना दिया और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब TMC ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि पार्टी प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में स्ट्रॉन्गरूम खोला गया है। TMC नेता कुणाल घोष और शशि पांजा ने दावा किया कि उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि वहां पोस्टल बैलेट और पिंक पेपर के साथ गतिविधि चल रही थी।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा में लापरवाही बरती जा रही है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा होती है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि EVM की सुरक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो उनकी पार्टी इसे “जीने-मरने की लड़ाई” के रूप में लड़ेगी।
धरने के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनाव प्रक्रिया का पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित होना जरूरी है। उनके इस कदम ने राज्य की सियासत को और गर्म कर दिया, जहां विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच आरोपों का दौर तेज हो गया है।
दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू है, जिसमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी, CCTV कैमरे और 24 घंटे की कड़ी सुरक्षा शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब चुनावी माहौल पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं और मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं।
फिलहाल, यह मुद्दा केवल तकनीकी सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और राजनीतिक विश्वास की परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और जांच इस विवाद की दिशा तय करेगी।


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