30 हजार सफाई कर्मियों की हड़ताल से बढ़ेगी मुश्किलें, विभाग की सख्ती—काम बंद तो वेतन कटौती तय

30 हजार सफाई कर्मियों की हड़ताल से बढ़ेगी मुश्किलें, विभाग की सख्ती—काम बंद तो वेतन कटौती तय

चंडीगढ़, 01 मई 2026 । नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रतिनिधियों और शहरी निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा के साथ बातचीत सिरे नहीं चढ़ सकी। आज से करीब 30 हजार सफाई कर्मियों के हड़ताल पर जाने की घोषणा के बाद प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ गई है। शहर की साफ-सफाई व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है, वहीं विभाग ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा। संघ के नेताओं ने दो टूक कहा कि जब जब तक सरकार भेदभाव समाप्त कर सफाई सीवर के काम से ठेका समाप्त नहीं करेगी, ठेके में लगे कर्मचारियों को विभाग के रोल पर कर न्यूनतम वेतन 30,000 देने का पत्र जारी नहीं करेगी, तब तक उनकी हड़ताल खत्म नहीं होगी।

सूत्रों के मुताबिक, सफाई कर्मियों की यह हड़ताल वेतन, स्थायीकरण, काम के घंटे और सुरक्षा उपकरणों की कमी जैसी कई लंबित मांगों को लेकर की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

दूसरी ओर, संबंधित विभाग का तर्क है कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था बाधित होने से जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए काम से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें वेतन कटौती प्रमुख है। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए सफाई कार्य जारी रखने की कोशिश की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी हड़ताल का असर केवल कूड़ा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर गर्मी के मौसम में कचरे के ढेर से दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं।

शहरवासियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि नियमित सफाई व्यवस्था बाधित होने से दैनिक जीवन प्रभावित होगा। वहीं, प्रशासन और कर्मचारियों के बीच जल्द समाधान निकलना बेहद जरूरी है ताकि स्थिति ज्यादा गंभीर न हो।

यह मामला अब केवल श्रमिक अधिकारों और प्रशासनिक सख्ती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शहरी प्रबंधन और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में वार्ता और समाधान की दिशा पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।