महाराष्ट्र में बीजेपी का स्पष्ट संदेश—हम सावरकर की विचारधारा को मानते हैं
मुंबई, 06 जनवरी 2026 । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वीर सावरकर की विचारधारा को लेकर बहस तेज़ हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने साफ शब्दों में कहा है कि पार्टी वीर सावरकर की विचारधारा को मानती है और उसी से प्रेरणा लेती है। बीजेपी के इस बयान के बाद राज्य की सियासत में वैचारिक टकराव और तेज़ हो गया है, क्योंकि सावरकर का नाम महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा से संवेदनशील और प्रभावशाली रहा है।
महाराष्ट्र सरकार में IT मंत्री और बीजेपी विधायक आशीष सेलार ने मंगलवार को कहा कि पार्टी सावरकर की विचारधारा को मानती है। उन्होंने कहा कि BJP अपने सहयोगियों से हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर का सम्मान करने की उम्मीद करती है।
इस बयान के बाद उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के नेतृत्व वाली NCP ने कहा कि हम अंबेडकरवादी विचारधारा के को मानते हैं। उसी पर चलेंगे।
वहीं सोमवार शाम को नांदेड़ की रैली में ओवैसी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी वक्फ अधिनियम के माध्यम से मुस्लिम धार्मिक संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें वोट ना दें।
इस बयान को विपक्ष की ओर से सावरकर पर की जा रही टिप्पणियों के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है। बीजेपी का आरोप है कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर सावरकर की छवि को विवादित बनाने की कोशिश करते हैं, जबकि उनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक रहा है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि सावरकर के विचारों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना महाराष्ट्र की अस्मिता का अपमान है।
महाराष्ट्र में सावरकर सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक भावनात्मक मुद्दा भी हैं। बीजेपी लंबे समय से उन्हें भारत रत्न देने की मांग करती रही है और उनकी विचारधारा को राष्ट्रवादी राजनीति का अहम आधार मानती है। इस ताज़ा बयान के जरिए पार्टी ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को यह संकेत देने की कोशिश की है कि वैचारिक स्तर पर वह पूरी तरह स्पष्ट और एकजुट है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों और बदलते सियासी समीकरणों के बीच बीजेपी का यह रुख उसके कोर वोटबेस को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। सावरकर की विचारधारा को सामने रखकर पार्टी न सिर्फ राष्ट्रवाद के मुद्दे को धार देना चाहती है, बल्कि महाराष्ट्र में अपनी वैचारिक जड़ों को भी और मजबूत करना चाहती है।
कुल मिलाकर, बीजेपी के इस बयान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में सावरकर का मुद्दा आने वाले समय में भी केंद्र में बना रहेगा और इस पर सियासी बहस और तेज़ होने की पूरी संभावना है।


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