बांग्लादेश में भयावह हादसा, जलते न्यूजरूम में 3 घंटे तक फंसे रहे पत्रकार

बांग्लादेश में भयावह हादसा, जलते न्यूजरूम में 3 घंटे तक फंसे रहे पत्रकार

ढाका, 19 दिसंबर 2025 । बांग्लादेश में पत्रकारिता जगत को झकझोर देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां एक न्यूज चैनल के न्यूजरूम में आग लगने के बाद कई पत्रकार करीब तीन घंटे तक अंदर फंसे रहे। आग इतनी भीषण थी कि पूरे न्यूजरूम में धुआं भर गया, बिजली सप्लाई ठप हो गई और बाहर निकलने के रास्ते बंद हो गए। इस दौरान पत्रकारों ने अपनी जान बचाने के लिए अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय दिया।

बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम आलो के ऑफिस जला डाले। हमले के बाद करीब 25 पत्रकार 3 घंटे तक न्यूजरूम में फंसे रहे।

प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के ऑफिस भी फूंक दिए। प्रोथोम आलो ऑफिस के परिसर के पास एक दुकान को भी आग लगा दी गई। इस घटना के बाद एक लड़की दुकान से किताबें बचाती दिखी।

यह हिंसा गुरुवार को शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की। हादी 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार कर रहे थे जब उन्हें सिर में गोली मारी गई।

इस हादसे में कुछ पत्रकारों को धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ और हल्की चोटें आईं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई। घटना के बाद न्यूज चैनल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पर सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इमारत में पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण और आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं थी।

पत्रकार संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पत्रकार पहले ही जोखिम भरे हालात में काम करते हैं, ऐसे में दफ्तरों में बुनियादी सुरक्षा का न होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से मांग की है कि मीडिया संस्थानों में सुरक्षा मानकों की सख्ती से जांच की जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।

यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा चेतावनी संकेत है। जलते न्यूजरूम में फंसे पत्रकारों की यह कहानी बताती है कि खबरें पहुंचाने वाले खुद कितनी खतरनाक परिस्थितियों का सामना करते हैं। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

टैग्स: