भगवंत मान सरकार का सार्वभौमिक स्वास्थ्य मॉडल: आयुष्मान भारत से अलग और व्यापक कवरेज की दिशा में बड़ा कदम

भगवंत मान सरकार का सार्वभौमिक स्वास्थ्य मॉडल: आयुष्मान भारत से अलग और व्यापक कवरेज की दिशा में बड़ा कदम

चंडीगढ़ , 23 मार्च 2026 । पंजाब में भगवंत मान सरकार द्वारा प्रस्तावित सार्वभौमिक स्वास्थ्य मॉडल देश की स्वास्थ्य नीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में उभर रहा है। यह मॉडल केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना से अलग दृष्टिकोण अपनाता है, जहां पात्रता, आय सीमा या सामाजिक वर्गीकरण की शर्तों के बजाय “हर परिवार” को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का लक्ष्य रखा गया है।

आयुष्मान भारत जैसी लक्षित योजनाओं के विपरीत, पंजाब का यह मॉडल सार्वभौमिक कवरेज पर आधारित है, जिसमें किसी भी प्रकार की पात्रता बाधा नहीं है। दोनों दृष्टिकोणों का अंतर बुनियादी है। मुख्यमंत्री सेहत योजना यह नहीं पूछती कि कौन पात्र है। पंजाब का हर निवासी इसमें शामिल है, आय की परवाह किए बिना।

इस मॉडल का मूल उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिकार के रूप में स्थापित करना है, न कि सुविधा के रूप में। आयुष्मान भारत में जहां मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को ही 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाता है, वहीं पंजाब का यह मॉडल बिना किसी आय प्रमाण या सामाजिक श्रेणी की बाध्यता के सभी परिवारों को कवर करने का दावा करता है। इसका अर्थ है कि मध्यम वर्ग और वे परिवार जो आयुष्मान भारत की पात्रता सूची से बाहर हैं, वे भी इस योजना के तहत लाभान्वित हो सकते हैं।

इस सार्वभौमिक स्वास्थ्य मॉडल में सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी शामिल करने की योजना है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे। साथ ही, कैशलेस इलाज की सुविधा, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, और पारदर्शी क्लेम प्रोसेसिंग जैसी व्यवस्थाएं इसे आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

हालांकि, इस मॉडल की सफलता कई कारकों पर निर्भर करेगी, जैसे वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, अस्पतालों की क्षमता, और क्रियान्वयन की पारदर्शिता। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार पर्याप्त बजट और मजबूत निगरानी तंत्र सुनिश्चित कर पाती है, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

अंततः, भगवंत मान सरकार का यह प्रयास भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के सार्वभौमिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग है, जो स्वास्थ्य को अधिकार बनाने की बहस को और मजबूती देता है।