ऑपरेशन सिंदूर पर बयान को लेकर चव्हाण अडिग, बोले—माफी मांगने का सवाल ही नहीं
नई दिल्ली, 17 दिसंबर 2025 । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दिए गए बयान पर मचे राजनीतिक विवाद के बीच चव्हाण ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि उनका बयान किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं था, बल्कि तथ्य और अपने दृष्टिकोण को रखने के लिए दिया गया था। इस मुद्दे पर सफाई और खेद जताने की मांग को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया है।
कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अपने दावे पर बुधवार को माफी मांगने से इनकार कर दिया है। चव्हाण ने कहा, 'मैं माफी नहीं मांगूंगा… मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है और मेरे पास माफी मांगने का कोई कारण नहीं है।'
उन्होंने एक दिन पहले था कि मई में पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष में भारतीय सेना को पहले दिन ही हार का सामना करना पड़ा था। इसको लेकर भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा सेना का अपमान करना अब कांग्रेस की पहचान बन गया है। यह सिर्फ पृथ्वीराज चव्हाण का बयान नहीं है, बल्कि राहुल गांधी भी पहले इसी तरह के बयान दे चुके हैं।
गिरिराज सिंह ने कहा- कांग्रेस सेना का अपमान कर रही
- केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि किसी को भी सशस्त्र बलों के शौर्य का अपमान या उसका दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं है। जो लोग सशस्त्र बलों की बहादुरी को नीचा दिखाते हैं, वे कभी भी देशहित में नहीं सोच सकते।
- जेडी(यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि पृथ्वीराज चव्हाण कांग्रेस नेता हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस को तुरंत कदम उठाना चाहिए। किसी को भी सेना की ताकत या क्षमता पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।
- बीजेपी सांसद ब्रिज लाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से पाकिस्तान समर्थक रही है और उसने बार-बार देश का अपमान किया है। कांग्रेस और उसके नेता देश को नीचा दिखाने का काम करते रहे हैं।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक ओर कुछ नेताओं ने चव्हाण के बयान को असंवेदनशील बताया है, वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है और अनावश्यक रूप से मुद्दे को बढ़ाया जा रहा है।
चव्हाण ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी से मूल मुद्दे भटक जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने रुख पर कायम हैं और किसी भी दबाव में आकर माफी नहीं मांगेंगे। उनके अनुसार, सच्चाई और विचारों के साथ खड़े रहना ज्यादा जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चल रहा यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। राजनीतिक बयानबाजी और प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक संवेदनशीलता जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।


RashtriyaPravakta