ताइवान को लेकर चीन-जापान के बीच बढ़ा तनाव: इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर मंडराए नए खतरे
बीजिंग/टोक्यो, 18 नवम्बर 2025 । ताइवान को लेकर एशिया की दो बड़ी ताकतों—चीन और जापान—के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। दोनों देशों की बयानबाजी, सैन्य गतिविधियाँ और राजनयिक दबाव अब ऐसे स्तर पर पहुँच चुके हैं, जिसने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और तीखा कर दिया है। ताइवान, जो पहले ही चीन के दबाव और अमेरिका के समर्थन के बीच फंसा हुआ है, अब जापान की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद और अधिक रणनीतिक महत्व के केंद्र में आ गया है।
तनाव की वजह: ताइवान पर चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता
चीन लंबे समय से ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता रहा है और "पुनर्एकीकरण" के लिए कभी भी सैन्य विकल्प से इनकार नहीं किया। हाल के महीनों में ताइवान के नजदीक PLA (चाइनीज़ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) की हवाई और नौसैनिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं।
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ताइवान स्ट्रेट में चीनी युद्धपोतों की संख्या बढ़ी
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ताइवान के ADIZ में बार-बार चीनी फाइटर जेट्स की घुसपैठ
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मिसाइल परीक्षणों और नौसैनिक अभ्यासों की तीव्रता में वृद्धि
जापान, जो ताइवान स्ट्रेट से महज 100 किमी दूर स्थित है, इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मान रहा है।
जापान की सख्त प्रतिक्रिया
जापान ने खुलकर कहा है कि ताइवान में कोई भी सैन्य संघर्ष उसके हितों और सुरक्षा रणनीति को प्रभावित करेगा।
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जापान ने ताइवान को “महत्वपूर्ण साझेदार” बताया
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रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
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चीन की बढ़ती आक्रामकता पर कड़ी चेतावनी
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पूर्वी चीन सागर में जापानी युद्धपोतों की तैनाती बढ़ाई
जापान का यह रुख बीजिंग को पसंद नहीं आया, और चीन ने इसे अपने “आंतरिक मामलों में दखल” करार दिया है।
चीन की नाराज़गी: जापान पर आक्रामक आरोप
चीनी विदेश मंत्रालय ने जापान को "खतरनाक खेल खेलने" का आरोप लगाया है।
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बीजिंग ने कहा जापान अमेरिका के एजेंडे का हिस्सा बन रहा है
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चीन ने चेतावनी दी कि "कोई भी बाहरी हस्तक्षेप गंभीर परिणाम देगा"
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मीडिया और थिंक-टैंक में जापान को "उकसाने वाला" बताया जा रहा है
जापान के रुख ने चीन को यह संदेश दिया है कि ताइवान का मुद्दा अब सिर्फ दो पक्षों का मामला नहीं रहा।
अमेरिका का परोक्ष प्रभाव
जापान और ताइवान दोनों अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं।
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अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा ने तनाव को और तीखा किया
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जापान को अमेरिका का रणनीतिक समर्थन मिलता रहा है
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चीन इसे "इंडो-पैसिफिक में घेराबंदी" की रणनीति के रूप में देखता है
अमेरिका के द्विपक्षीय सुरक्षा समझौतों की वजह से जापान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
क्यों बढ़ सकता है संघर्ष का खतरा?
ताइवान स्ट्रेट में किसी भी टकराव के संकेत पर जापान की सामरिक भूमिका स्वतः बढ़ जाती है।
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जापान के ओकिनावा में अमेरिकी बेस
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ताइवान के करीब जापान के द्वीप
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चीन की आक्रामक सैन्य रणनीति
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मल्टी-पावर कॉन्फ्लिक्ट की आशंका
इन सभी कारणों से स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय महत्व
ताइवान सेमीकंडक्टर उद्योग का केंद्र है।
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वैश्विक चिप सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
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जापान-चीन व्यापार पर भी असर पड़ सकता है
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हिंद-प्रशांत शक्ति संतुलन में बदलाव संभव
इसलिए दुनिया की निगाहें लगातार इस मुद्दे पर टिकी हुई हैं।


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