चीन ने राफेल की बिक्री रोकने के लिए चलाया कैंपेन
वॉशिंगटन, 19 नवम्बर 2025 । हाल ही में फ्रांसीसी खुफिया एजेंसियों और अन्य स्रोतों ने आरोप लगाया है कि चीन ने राफेल लड़ाकू जेट की वैश्विक बिक्री को रोकने के लिए एक सुविचारित “दुष्प्रचार (डिसइन्फोर्मेशन) अभियान” चलाया। उनकी मंशा न सिर्फ राफेल की छवि बिगाड़ने की थी, बल्कि उसे खरीदने की संभावनाओं वाले देशों को चीन-निर्मित विमानों की ओर मोड़ने की भी थी।
एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने राफेल की बिक्री रोकने के लिए फर्जी कैंपेन चलाया था।
मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के तुरंत बाद चीन ने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए राफेल गिराने का दावा किया।
यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि चीन ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष का फायदा उठाया और अपने हथियारों की खूबियां दिखाने की कोशिश की।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने फ्रांस के राफेल फाइटर जेट की बिक्री रोकने और अपने J-35 लड़ाकू विमानों के प्रचार के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स चलाए।
इन अकाउंट्स से AI से बनाई गई नकली तस्वीरें फैलाई गईं, जिनमें दावा किया गया कि भारतीय राफेल को चीन के हथियारों ने गिराया है और यह उसके मलबे की तस्वीरें हैं।
चीन को लेकर 5 बड़े खतरे उजागर
- रिपोर्ट में कई रिस्क बताए गए हैं, जो अमेरिका के लिए आर्थिक, तकनीकी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम हैं।
- रिपोर्ट बताती है कि चीन एडवांस टैक्नोलॉजीज (जैसे एआई, क्वांटम कम्प्यूटिंग, रोबोटिक्स) में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- इसमें बताया गया है कि चीन जरूरी कच्चे माल, टेक्नोलॉजी पर कंट्रोल रखता है। ऐसे में वह सप्लाई चेन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।
- रिपोर्ट में चीन के रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ पार्टनरशिप को लेकर भी चिंता जताई गई है।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन कई देशों के साथ आर्थिक-सैन्य रणनीतिक रिश्ते मजबूत कर रहा है, जिससे उसकी वैश्विक पहुंच और शक्ति बढ़ रही है।
- रिपोर्ट में चीन-निर्मित ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम (जैसे बैटरियां) पर चिंता जताई गई है, खासकर वे सिस्टम जिसमें रिमोट मॉनिटरिंग की सुविधा है। चीन इनका दुरुपयोग कर साइबर खतरे पैदा कर सकता है।


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