दावा—अफसर रिटायर होकर 20 साल तक किताब प्रकाशित नहीं करा सकेंगे
नई दिल्ली, 14 फ़रवरी 2026 । हाल में एक दावा सामने आया है कि सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी रिटायरमेंट के बाद 20 वर्षों तक अपनी पुस्तक प्रकाशित नहीं करा सकेंगे। इस दावे ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, गोपनीयता नियमों और सेवा शर्तों को लेकर बहस छेड़ दी है।
नियमों की वास्तविक स्थिति
भारत में सिविल सेवकों पर सेवा के दौरान और उसके बाद कुछ गोपनीयता प्रतिबंध लागू होते हैं, जो आधिकारिक रहस्यों और संवेदनशील सूचनाओं से जुड़े होते हैं। इसके लिए Official Secrets Act और सेवा आचरण नियम लागू होते हैं।
हालांकि, ऐसा कोई सार्वभौमिक कानून सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं है जो सभी सेवानिवृत्त अधिकारियों पर 20 साल तक पुस्तक प्रकाशन का पूर्ण प्रतिबंध लगाता हो।
सरकार रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रही है। इस अवधि के दौरान वे अपनी सेवा से जुड़ी किताब प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। इस मुद्दे पर चर्चा पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच हुई है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में यह विषय सामने आया। कई मंत्रियों का मानना था कि मिलिट्री अधिकारियों समेत अहम पदों पर रहे अधिकारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने से पहले एक निश्चित कूलिंग-ऑफ पीरियड होनी चाहिए।
टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक, यह मुद्दा कैबिनेट के आधिकारिक 27 बिंदुओं के एजेंडे में शामिल नहीं था, लेकिन सामान्य चर्चा के दौरान उठा। हालांकि इस पर जल्द ही आदेश जारी हो सकता है।
क्या है नरवणे की किताब का विवाद
पूर्व आर्मी चीफ नरवणे के मेमॉयर फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर विवाद 2 फरवरी को शुरू हुआ था। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मेमॉयर में बताई गई घटनाओं का जिक्र करने की कोशिश की, और सरकार ने इस पर कड़ा एतराज जताया क्योंकि किताब पब्लिश नहीं हुई थी।
बाद में गांधी किताब की एक कॉपी संसद में लाए, ताकि यह साबित हो सके कि किताब मौजूद है। जल्द ही, किताब का PDF सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा। संसद से सामने आए मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की। डिजिटल और दूसरे फॉर्मेट में मैन्युस्क्रिप्ट के गैर-कानूनी सर्कुलेशन की जांच शुरू कर दी।
किताब की पब्लिशर पेंगुइन इंडिया ने एक बयान में कहा- किताब से जुड़ा जितना हिस्सा सर्कुलेशन में है, कॉपीराइट का उल्लंघन है। इसके बाद नरवणे ने चुप्पी तोड़ी और पब्लिशर के स्टैंड का समर्थन कि किताब पब्लिश नहीं हुई। न ही जनता के लिए उपलब्ध कराई गई है।


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