भावी जीवन साथी की जासूसी
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर। "
नई दिल्ली। बदलते सामाजिक मूल्यों का असर समाज में हर तरफ देखने को मिल रहा है। वैवाहिक संबंधों में आ रही कड़वाहट और पूर्व के प्रेम प्रसंगों की वजह से पति या पत्नी को मौत के घाट उतरवा देने की घटनाओं ने युवा पीढ़ी को इतना विचलित कर दिया है कि अब वह अपने मंगेतर की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही उसका अतीत खंगालने के लिए निजी जासूसी संस्थाओं का सहारा ले रही है। जिसकी वजह से ऐसी संस्थाओं के कारोबार में पिछले एक साल के दौरान ही 40 से भी ज्यादा फीसदी का इजाफा हुआ है।
युवा इन निजी जासूसी संस्थाओं के जरिए अपने मंगेतर के अतीत में झांकने के साथ ही उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी हासिल कर रहे हैं। हालांकि ऐसा करने के लिए उन्हें निजी जासूसी संस्थाओं को अच्छी खासी रकम का भुगतान भी करना पड़ रहा है। लेकिन वह शादी के बाद होने वाला किसी भी प्रकार का जोखिम लेने को तैयार नहीं है।
दरअसल युवा वर्ग शादी के बाद प्रेम प्रसंग व अन्य कारणों से जीवन साथी को मौत के घाट उतरवा देने के बढ़ते मामलों के कारण भयाक्रांत हो गया है। हाल ही में इस प्रकार की घटनाओं में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी हुई है। जिसमें पत्नी ने अपने पूर्व प्रेमी या विवाह के बाद पनपे प्रेम प्रसंग की वजह से अपने पति की जीवन लीला समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई है। इसी प्रकार बेवफ़ा पति के अपनी पत्नी से छुटकारा पाने के लिए उसकी हत्या करने या करवा देने की घटनाएं बढ़ गईं हैं। यही वजह है कि युवा पीढ़ी अब अपना जीवन सुरक्षित करने के साथ ही अपने भावी जीवन साथी का हर पहलु जान लेना चाहती है। इसी वजह से निजी संस्थाओं की सेवा लेने का चलन काफी बढ़ गया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की एक प्रोफेसर के मुताबिक अब शादियां काफी उम्र हो जाने के बाद हो रहीं हैं। बढ़ती उम्र के कारण दो विपरीत लिंगी वयस्कों में एक दूसरे के प्रति आकर्षण व प्रेम होना स्वाभाविक है। इसमें गलत कुछ भी नहीं है। उनके मुताबिक पारिवारिक व अन्य दबाव के चलते युवक युवतियां अपने माता पिता की ओर से तय किए गए व्यक्ति से शादी तो कर लेते हैं लेकिन जीवन साथी को दिल से नहीं अपना पाते हैं। यही वजह है की शादी के बंधन में बंधने के बावजूद वह अनचाहे जीवन साथी से छुटकारा पाना चाहते हैं। जिसकी परिणीति हत्या जैसे मामलों से होती है।
इसी मुद्दे पर दिल्ली उच्च व सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिओम गुप्ता व इंदु शेखर के मुताबिक भारत में तलाक लेने की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल है। जिसकी वजह से तलाक मिलने में सालों लग जाते हैं। यही वजह है की अनचाहे जीवन साथी से छुटकारा पाने के लिए उसकी हत्या करने या करवा देने के मामले काफी बढ़ गए हैं। इन दोनों का यह कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये कानून में आवश्यक बदलाव करना चाहिए। जिससे किसी भी कारण से साथ न रहने के इच्छुक पति व पत्नी आसानी से एक दूसरे से अलग हो सकें।
इन दोनों के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी शिक्षित व जागरूक है, इसलिए अगर वह अपने भावी जीवन साथी के अतीत और वर्तमान गतिविधियों के बारे में जानने के लिए निजी जासूसी संस्थाओं की मदद ले रही है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है। दिल्ली में शादी से पहले व बाद में अपने जीवन साथी के बारे में गोपनीय तरीके से जांच कराने के मामलों में पिछले एक साल के दौरान 40 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफा हुआ।
निजी जासूसी संस्थाओं के संचालकों के मुताबिक पिछले कुछ सालों से शादियों के रिश्ते पारम्परिक तरीकों की बजाय ऑनलाइन साइटों के जरिए तय हो रहे हैं। ऐसे में लोग बड़ी संख्या में धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। वर या वधू की ओर से दी जा रही जानकारियां गलत साबित हो रहीं है। यह ही वजह है कि मंगनी होने के बाद अपने भावी जीवन साथी की ओर से दी गई जानकारी की सत्यता जांचने के साथ ही उसके अतीत व वर्तमान गतिविधियों के बारे में गहराई से जानना चाहते हैं। निजी जासूसी संस्थाओं ने अपने काम से कई गलत शादियां होने से रुकवा दी हैं।


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