CJI पर जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज — न्यायपालिका की गरिमा पर हमला

CJI पर जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज — न्यायपालिका की गरिमा पर हमला

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2025 । देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के मुख्य न्यायाधीश (CJI) पर जूता फेंकने की घटना ने अदालत की गरिमा और सार्वजनिक विश्वास पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस मामले में घटना को लेकर संबंधित वकील के खिलाफ अवमानना का केस दर्ज किया गया है, और न्यायपालिका ने इस प्रकार के व्यवहार को न केवल अस्वीकार्य बताया है बल्कि इसके खिलाफ कड़ा संदेश भी दिया है।

अटॉर्नी जनरल ने भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई पर जूता फेंकने वाले एक वकील के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करने की परमिशन दे दी है। यह जानकारी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को दी गई।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन प्रमुख विकास सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच से सुनवाई की अपील की है।

सिंह ने कहा कि 6 अक्टूबर को हुई इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर उन्माद फैल गया है। यह सुप्रीम कोर्ट की अखंडता और गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। आरोपी को भी पछतावा नहीं है।

हालांकि बेंच ने कहा कि जब अदालत में पहले से ही कई केस पेंडिंग हैं, इस केस पर 5 मिनट खर्च करना कितना सही होगा।

सोशल मीडिया पर अपमान करने वाली टिप्पणियां रोकने के आदेश की मांग

कोर्ट में विकास सिंह ने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ एक व्यापक आदेश पारित किया जा सकता है। उन्होंने जॉन डो आदेश की मांग रखी। हालांकि, जस्टिस बागची ने कहा कि इस तरह के एकमुश्त आदेश से और बहस छिड़ जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जज ऐसे हमलों से संयमित तरीके से निपटें।

जस्टिस बागची बोले- हमारा व्यवहार और हम खुद को कैसे संभालते हैं, उससे हमें सम्मान मिलता है। CJI ने इसे एक गैर-जिम्मेदार नागरिक का कृत्य बताकर दरकिनार कर दिया है। आपको इस बात पर विचार करना होगा कि क्या उस घटना को उठाना जरूरी है जिसका हमने निपटारा कर दिया है।

इस पर सिंह ने कह कि जूता फेंकने की घटना का महिमा मंडन बंद होना चाहिए। जस्टिस कांत ने कहा कि एक बार जब हम इस मुद्दे को उठाएंगे, तो इस पर कई सप्ताह तक चर्चा होगी। वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि हम पैसा कमाने वाले उद्यम बन गए हैं।

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस घटना ने बहस को जन्म दिया है कि न्यायपालिका की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम और कार्रवाई की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं और जल्द ही विस्तृत सुनवाई कर सख्त निर्णय लेने की संभावना है।