JNU में विवादित नारों से बढ़ा सियासी तनाव, “मोदी–शाह की कब्र खुदेगी” के नारे पर जांच की मांग

JNU में विवादित नारों से बढ़ा सियासी तनाव, “मोदी–शाह की कब्र खुदेगी” के नारे पर जांच की मांग

नई दिल्ली, 06 जनवरी 2026 । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में कथित तौर पर लगे विवादित नारों को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और दावों के अनुसार कुछ छात्रों द्वारा “मोदी–शाह की कब्र खुदेगी” जैसे नारे लगाए गए, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। इस घटना ने एक बार फिर कैंपस राजनीति, अभिव्यक्ति की सीमा और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में सोमवार रात कुछ छात्रों ने पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए। नारेबाजी का 35 सेकेंड का वीडियो मंगलवार को सामने आया। यह अब वायरल हो रहा है।

वीडियो में छात्र 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' नारे लगाते और गाते दिखे। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया है कि JNU में यह प्रदर्शन उमर खालिद-शरजील के समर्थन में हुआ। यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रविरोधी विचारधारा का प्रसार है। कांग्रेस ने कहा है कि यह गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका है।

दरअसल, एक दिन पहले 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था।

JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल तत्व है, लेकिन हिंसा, धमकी या नफरत को बढ़ावा देने वाले वक्तव्य कानून के तहत दंडनीय हो सकते हैं। ऐसे मामलों में तथ्यात्मक जांच, संदर्भ और मंशा का आकलन बेहद जरूरी होता है, ताकि उचित और संतुलित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

JNU पहले भी छात्र आंदोलनों और राजनीतिक बहसों के लिए चर्चा में रहा है। इस ताज़ा विवाद ने एक बार फिर कैंपस में संवाद बनाम उग्र भाषा की बहस को तेज़ कर दिया है। फिलहाल सभी की निगाहें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में क्या हुआ और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।