लोकसभा में अमित शाह के कथित आपत्तिजनक शब्द पर विवाद तेज — सदन की गरिमा, राजनीतिक मर्यादा और विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया पर विस्तृत रिपोर्ट
नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025 । लोकसभा के सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कथित रूप से एक आपत्तिजनक शब्द बोले जाने का मामला राजनीतिक हलकों में बड़ी बहस का विषय बन गया है। घटना के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और सदन की कार्यवाही में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
लोकसभा में बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव सुधार और SIR पर संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को जमकर फटकार लगाई। भाषण के बीच बोलने वाले विपक्षी सांसद को नसीहत दी।
संबोधन के दौरान शाह के मुंह से गुस्से में आपत्तिजनक शब्द भी निकला। उन्होंने ये भी कहा कि 2014 के बाद से भाजपा की जीत पर विपक्ष कौ-कौ-कौ करता है।
विपक्ष जब हंगामा कर रहा था तब शाह गुस्से में आ गए। उन्होंने विपक्ष की ओर उंगली दिखाते हुए कहा- मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा। 30 साल से जनप्रतिनिधि हूं, आपकी मुंसिफगिरी संसद में नहीं चलेगी।
विपक्ष का कहना है कि उच्च पदों पर बैठे नेताओं को भाषण देते समय अधिक संयम और मर्यादा रखनी चाहिए, क्योंकि उनके शब्द संसद की गरिमा को प्रभावित करते हैं। कई विपक्षी सांसदों ने इस कथित टिप्पणी को असंसदीय, अनुचित, और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। उन्होंने इस पर स्पष्टीकरण और आवश्यक कार्रवाई की मांग भी की।
सत्ता पक्ष की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि बयान को गलत अर्थ में लिया गया या संदर्भ से बाहर पेश किया गया है। उनका कहना है कि विपक्ष मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तूल दे रहा है, जबकि पूरी बातचीत का सार अलग था।
संसद विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद ना केवल सदन की कार्यवाही प्रभावित करते हैं बल्कि जनता की नजर में राजनीतिक संतुलन और संवाद की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करते हैं। अगर यह मामला बढ़ता है तो स्पीकर की ओर से ‘शब्द हटाने’, ‘चेतावनी’ या ‘स्पष्टीकरण मांगने’ जैसी कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।
यह स्पष्ट है कि एक शब्द ने पूरे राजनीतिक माहौल में नई हलचल ला दी है, और आने वाले सत्रों में यह विवाद और भी बड़ा रूप ले सकता है।


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