मुख्यमंत्री धामी से बार एसोसिएशन देहरादून के प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

मुख्यमंत्री धामी से बार एसोसिएशन देहरादून के प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

देहरादून, 26 मार्च 2026 । उत्तराखंड की राजधानी Dehradun में Pushkar Singh Dhami से बार एसोसिएशन देहरादून के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान न्यायिक व्यवस्था, अधिवक्ताओं की समस्याओं और न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

इस दौरान नई आपराधिक संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नई संहिताओं के लागू होने से न्याय प्रणाली अधिक सुदृढ़, त्वरित एवं जनोन्मुखी बनेगी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिवक्ताओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने में बार और बेंच के बीच समन्वय आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार न्यायिक अधोसंरचना के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। न्यायालय परिसरों का आधुनिकीकरण, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार, ई-कोर्ट प्रणाली को बढ़ावा तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की सुविधा हेतु बार भवनों के निर्माण, पुस्तकालयों के सुदृढ़ीकरण तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष अधिवक्ताओं की कार्य परिस्थितियों, बुनियादी सुविधाओं और न्यायालय परिसर में आवश्यक सुधारों की मांग रखी। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी संसाधनों के विस्तार पर भी जोर दिया।

मुख्यमंत्री धामी ने अधिवक्ताओं की भूमिका को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस दौरान राज्य में ई-कोर्ट व्यवस्था, डिजिटल फाइलिंग और न्यायिक ढांचे के आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार न्यायिक प्रणाली को आधुनिक और सुलभ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सके।

इस शिष्टाचार भेंट को सरकार और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर संवाद और सहयोग की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जिससे भविष्य में न्याय व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में मदद मिल सकती है।