Delhi Liquor Scam: हाई कोर्ट पहुंची CBI, निचली अदालत के आदेश को दी चुनौती
नई दिल्ली, 27 फ़रवरी 2026 । दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले, जिसे आमतौर पर Delhi Liquor Scam कहा जा रहा है, में जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) ने निचली अदालत के एक आदेश को चुनौती देते हुए Delhi High Court का रुख किया है। यह कदम मामले की कानूनी दिशा और आगे की जांच पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल कथित शराब घोटाले में आज बरी हो गए हैं. उनके साथ ही अन्य आरोपियों को भी निचली अदालत ने बरी कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले को केजरीवाल ने ऐतिहासिक करार दिया है. साथ ही बीजेपी पर षडयंत्र रचने का आरोप लगाया है. इन सबके बीच अब सीबीआई दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गई है. उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है. इससे पहले निचली अदालत के फैसले पर आम आदमी पार्टी ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पूरी बीजेपी ने देश के सबसे कट्टर ईमानदार दल आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया को बदनाम करने के लिए फर्जी शराब घोटाला बनाया. इसको सही साबित करने के लिए पूरी सरकार और उसकी सभी जांच एजेंसियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया लेकिन एक पैसे का भी भ्रष्टाचार साबित नहीं कर पाई.
यह विवाद दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें लाइसेंस आवंटन और राजस्व संरचना को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि नीति में कथित तौर पर कुछ कारोबारियों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि संबंधित पक्ष इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
इस मामले में कई राजनीतिक और कारोबारी हस्तियों से पूछताछ हो चुकी है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई थीं।
CBI ने क्यों दी चुनौती?
सूत्रों के अनुसार, निचली अदालत ने हाल में एक ऐसा आदेश दिया था जिसे CBI ने जांच के दृष्टिकोण से प्रतिकूल माना। इसी आदेश को रद्द कराने या उसमें संशोधन की मांग को लेकर एजेंसी हाई कोर्ट पहुंची है।
CBI का तर्क है कि जांच प्रक्रिया और साक्ष्य संकलन के लिए कुछ कानूनी संरक्षण और स्वतंत्रता आवश्यक है, जबकि बचाव पक्ष का कहना है कि अदालत के आदेश पूरी तरह कानून के अनुरूप हैं।
अब नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर है। यदि अदालत CBI की याचिका स्वीकार करती है, तो निचली अदालत के आदेश में बदलाव संभव है। वहीं, यदि याचिका खारिज होती है, तो एजेंसी को वैकल्पिक कानूनी रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
इस बीच, Delhi Liquor Scam का मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और आने वाले फैसले से इसकी दिशा और स्पष्ट होगी।


RashtriyaPravakta