दिल्ली ब्लास्ट की जांच में बड़ा खुलासा: पाकिस्तान से भेजे गए बम बनाने के 40 वीडियो, साजिश का नेटवर्क और गहरा
नई दिल्ली, 21 नवम्बर 2025 । दिल्ली में हुए हालिया ब्लास्ट की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ा सुराग मिला है—जांच में पता चला है कि पाकिस्तान से सीधे 40 बम बनाने के वीडियो भारत में मौजूद मॉड्यूल को भेजे गए थे।
इन वीडियो में न सिर्फ बम बनाने की तकनीक दिखाई गई थी, बल्कि उन्हें कैसे छिपाना है, कहां रखना है, और किस तरह सुरक्षा एजेंसियों से बचकर गतिविधियाँ चलानी हैं, इसका भी विस्तृत तरीका समझाया गया था।
दिल्ली ब्लास्ट केस में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कनेक्शन का खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान से जैश के हैंडलर हंजुल्ला ने दिल्ली धमाके के आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनई को बम बनाने के 40 वीडियो भेजे थे।
दोनों को जम्मू के शोपियां का रहने वाले मौलवी इरफान अहमद ने मिलवाया था। इसके बाद व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल तैयार किया था और कई डॉक्टर्स को इससे जोड़ा गया। दिल्ली धमाका भी इसी मॉड्यूल का हिस्सा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि हंजुल्ला जैश हैंडलर का कोर्ड नेम हो सकता है। 18 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के नौगाम में लगे जैश पोस्टरों में भी कमांडर हंजुल्ला भैया का नाम था। इसी से जांच एजेंसियों को शक हुआ।
जांच अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली ब्लास्ट कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित मॉड्यूल का हिस्सा था। भारत में मौजूद स्लीपर सेल्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निर्देश भेजे जा रहे थे।
पाकिस्तान के हैंडलर्स ने वीडियो को छोटे-छोटे हिस्सों में भेजा ताकि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बच सकें। कई वीडियो एन्क्रिप्टेड फॉर्मेट में साझा किए गए, जिन्हें डिकोड करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ती है।
डॉ. मुजम्मिल आटा चक्की से यूरिया पीसता था
दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, डॉ. आदिल अहमद राथर और मौलवी इरफान को NIA ने हिरासत में ले लिया है। इससे पहले, जांच टीम ने फरीदाबाद के धौज गांव में रह रहे एक टैक्सी ड्राइवर के घर से आटा चक्की और कुछ इलेक्ट्रॉनिक मशीनें बरामद कीं।
इसमें मेटल पिघलाने की मशीन भी है। जांच एजेंसी को जुड़े सूत्रों ने बताया कि इसी आटा चक्की में डॉ. मुजम्मिल यूरिया पीसता था, फिर मशीन से उसे रिफाइन करता था। इसके बाद केमिकल मिलाकर विस्फोटक बनाता था। केमिकल अलफलाह यूनिवर्सिटी की लैब से चुराया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत को अस्थिर करने की हाइब्रिड वॉरफेयर रणनीति का एक हिस्सा है, जिसमें डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर आतंक मॉड्यूल सक्रिय किए जाते हैं।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट हो रहा है कि यह केस भारत की आंतरिक सुरक्षा और साइबर निगरानी तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आने वाले दिनों में एजेंसियाँ और गिरफ्तारियाँ कर सकती हैं, क्योंकि बरामद डिजिटल सबूतों में कई संदिग्धों के नाम और लोकेशन संकेत भी मौजूद हैं।
दिल्ली में हुए हालिया ब्लास्ट की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ा सुराग मिला है—जांच में पता चला है कि पाकिस्तान से सीधे 40 बम बनाने के वीडियो भारत में मौजूद मॉड्यूल को भेजे गए थे।
इन वीडियो में न सिर्फ बम बनाने की तकनीक दिखाई गई थी, बल्कि उन्हें कैसे छिपाना है, कहां रखना है, और किस तरह सुरक्षा एजेंसियों से बचकर गतिविधियाँ चलानी हैं, इसका भी विस्तृत तरीका समझाया गया था।
दिल्ली ब्लास्ट केस में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कनेक्शन का खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान से जैश के हैंडलर हंजुल्ला ने दिल्ली धमाके के आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनई को बम बनाने के 40 वीडियो भेजे थे।
दोनों को जम्मू के शोपियां का रहने वाले मौलवी इरफान अहमद ने मिलवाया था। इसके बाद व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल तैयार किया था और कई डॉक्टर्स को इससे जोड़ा गया। दिल्ली धमाका भी इसी मॉड्यूल का हिस्सा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि हंजुल्ला जैश हैंडलर का कोर्ड नेम हो सकता है। 18 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के नौगाम में लगे जैश पोस्टरों में भी कमांडर हंजुल्ला भैया का नाम था। इसी से जांच एजेंसियों को शक हुआ।
जांच अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली ब्लास्ट कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित मॉड्यूल का हिस्सा था। भारत में मौजूद स्लीपर सेल्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निर्देश भेजे जा रहे थे।
पाकिस्तान के हैंडलर्स ने वीडियो को छोटे-छोटे हिस्सों में भेजा ताकि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बच सकें। कई वीडियो एन्क्रिप्टेड फॉर्मेट में साझा किए गए, जिन्हें डिकोड करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ती है।
डॉ. मुजम्मिल आटा चक्की से यूरिया पीसता था
दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, डॉ. आदिल अहमद राथर और मौलवी इरफान को NIA ने हिरासत में ले लिया है। इससे पहले, जांच टीम ने फरीदाबाद के धौज गांव में रह रहे एक टैक्सी ड्राइवर के घर से आटा चक्की और कुछ इलेक्ट्रॉनिक मशीनें बरामद कीं।
इसमें मेटल पिघलाने की मशीन भी है। जांच एजेंसी को जुड़े सूत्रों ने बताया कि इसी आटा चक्की में डॉ. मुजम्मिल यूरिया पीसता था, फिर मशीन से उसे रिफाइन करता था। इसके बाद केमिकल मिलाकर विस्फोटक बनाता था। केमिकल अलफलाह यूनिवर्सिटी की लैब से चुराया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत को अस्थिर करने की हाइब्रिड वॉरफेयर रणनीति का एक हिस्सा है, जिसमें डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर आतंक मॉड्यूल सक्रिय किए जाते हैं।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट हो रहा है कि यह केस भारत की आंतरिक सुरक्षा और साइबर निगरानी तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आने वाले दिनों में एजेंसियाँ और गिरफ्तारियाँ कर सकती हैं, क्योंकि बरामद डिजिटल सबूतों में कई संदिग्धों के नाम और लोकेशन संकेत भी मौजूद हैं।


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