दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: गिग वर्कर्स के लिए रेस्ट सेंटर और सस्ते भोजन की सुविधा, 717 परिवारों को मिला पक्का घर
नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026 । राजधानी दिल्ली में काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स—जैसे डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर—के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार ने एक अहम सामाजिक सुरक्षा कदम उठाते हुए गिग वर्कर्स के लिए रेस्ट सेंटर और सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी दी है। इसके साथ ही शहरी गरीबों के लिए आवास सुविधा को मजबूत करते हुए 717 परिवारों को पक्के घर देने की पहल भी की गई है।
झुग्गी में रहने वाले परिवारों के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सावदा-घेवरा इलाके में बने ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स में 717 परिवारों को घर देने का फैसला लिया गया है। इनमें 528 ऐसे परिवार हैं जो सभी मानकों पर खरे उतरते हैं, जबकि 189 परिवार अन्य श्रेणी में रखे गए हैं। ये परिवार अलग-अलग झुग्गी बस्तियों से आते हैं और लंबे समय से पक्के मकान का इंतजार कर रहे थे।
गिग वर्कर्स के लिए रेस्ट सेंटर और भोजन योजना
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर्स की भूमिका अहम होती जा रही है, लेकिन इनके लिए सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार शहर के विभिन्न हिस्सों में रेस्ट सेंटर स्थापित करेगी, जहां वर्कर्स को आराम करने, मोबाइल चार्ज करने और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।
इसके अलावा, इन केंद्रों पर सस्ते और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था भी होगी, जिससे दिनभर काम करने वाले वर्कर्स को आर्थिक राहत मिलेगी। यह कदम खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो लंबी शिफ्ट में काम करते हैं और महंगे भोजन का खर्च उठाने में कठिनाई महसूस करते हैं।
717 परिवारों को पक्के घर देने की पहल
आवास के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 717 जरूरतमंद परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने की घोषणा की है। यह पहल शहरी गरीबों को झुग्गी-झोपड़ी से निकालकर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस योजना के तहत लाभार्थियों को न सिर्फ रहने के लिए स्थायी घर मिलेगा, बल्कि बेहतर स्वच्छता, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा और सामाजिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।
समावेशी विकास की दिशा में कदम
इन दोनों फैसलों को दिल्ली में समावेशी विकास (Inclusive Development) की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। गिग इकॉनमी से जुड़े लोगों को पहली बार इस स्तर पर पहचान और सुविधा देना सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल कामगारों की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि शहरी गरीबी को कम करने में भी मदद मिलेगी। आने वाले समय में अन्य राज्यों द्वारा भी ऐसे मॉडल को अपनाने की संभावना जताई जा रही है।


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